24 कोसीय परिक्रमा :अमावस्या पर लाखों श्रद्धालू करेंगे लोहार्गल के सूर्य कुंड में शाही स्नान
उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव)
निकटवर्ती धार्मिक तीर्थ स्थल लोहार्गल धाम के पवित्र सूर्यकुंड में मंगलवार को एकादशी पर भी स्नान कर श्रद्धालुओं ने 24 कोसी परिक्रमा शुरू की। हालांकि परिक्रमा गोगानवमी से शुरू हो चुकी है लेकिन एकादशी के दिन सूर्यकुंड में स्नान करना और परिक्रमा में जाना शुभ माना जाता है। इन दिनों म्हारो हेलो सुणोजी बाबा मालखेत, बाबा मालखेत की जय, शाकंभरी मैया की जय, लोहार्गल धाम की जय आदि जयकारे अरावली की वादियों में गूंज रहे हैं। वहीं जगह-जगह सेवा शिविरों के माध्यम से लोग श्रद्धालुओं की सेवा कर रहे हैं। गोगानवमी से शुरू हुई परिक्रमा में गए श्रद्धालु गुरुवार रात से लौटना शुरू हो जाएंगे। एकादशी पर परिक्रमा शुरू करने वाले श्रद्धालु अमावस्या को लोहार्गल धाम पहुंचंगे।
परिक्रमार्थियों की जुबानी : बजरंग लाल 45वीं बार कर रहे परिक्रमा.......
पाटोदी के निवासी 68 वर्षीय बजरंग लाल इस बार 45वीं बार बाबा मालकेतु की परिक्रमा में आए हैं। बजरंग लाल पहले अपनी मां किस्तूरी देवी को परिक्रमा करवाने के लिए आते थे, अब मां के बुजुर्ग हो जाने के बाद ग्रामीणों व भाइयों के साथ आ रहे हैं। सुलखणिया राजगढ़ निवासी 67 वर्षीय सीता देवी इस बार बाबा मालकेतु की परिक्रमा में 18वीं बार आई है। सीता देवी अपने परिवार के साथ परिक्रमा देने के लिए आती हैं। सीकर जिले की लक्ष्मणगढ़ तहसील के गांव बुजिया नाऊं निवासी 82 वर्षीय पूर्णाराम चाहर व 74 वर्षीय मोहनलाल नेहरा दोनों मित्र हैं। वे 11 वर्षों से साथ-साथ बाबा मालकेतु की परिक्रमा में आ रहे हैं। जाजोद निवासी 82 वर्षीय लक्ष्मी देवी लोहार्गल धाम में बाबा मालकेतु की परिक्रमा में इस बार सातवीं बार आई हैं। वे अपनी बेटी को साथ लेकर आती हैं। लक्ष्मी देवी बुजुर्ग होने के बाद भी अभी तक परिक्रमा करते समय थकती नहीं है। चूरू जिले के सांत्यू निवासी 66 वर्षीय संतरा देवी ने बताया कि वह हमेशा परिवार के साथ बाबा मालकेतु की परिक्रमा में आती है। अकेली कभी नहीं आती। परिक्रमा के दौरान संतरा देवी का परिवार बरजी देवी की सेवा करते हुए चलता है। सीकर जिले के चैनपुरा दादली गांव के निवासी 61 वर्षीय बाबूलाल शर्मा 23 वर्षों से परिक्रमा में आ रहे हैं। बाबूलाल शर्मा परिक्रमा में आकर काफी खुश हैं और उन्हाेंने बताया कि परिक्रमा में आने से परिक्रमा मार्ग में काफी रिश्तों से रिश्तेदारों से मुलाकात हो जाती है। पहाड़ों पर चढ़ने से शरीर भी बलवर्धक होता है।
परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह लगा रहे हैं भंडारे.....
24 कोसी परिक्रमा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर लोग श्रद्धालुओं की सेवा के लिए निशुल्क रूप से भंडारे लगाए जा रहे हैं। परिक्रमा मार्ग के पहले गांव चिराना में पहला विशाल भंडारा गढ़ बालाजी सेवा समिति की ओर से लगाया गया है। मंगलवार को एकादशी होने के कारण यहां व्रत के हिसाब से फलाहार प्रसाद वितरित किया गया। गढ़ बालाजी सेवा समिति के करीब 38 महिला-पुरुष सेवक यहां व्यवस्थाओं में लगे हुए हैं।


