कठूमर में जल झूलनी एकादशी पर निकाले भगवान के डोल
कठूमर (दिनेश लेखी) कस्बे में एकादशी पर्व पर सीताराम जी मंदिर से भगवान की झांकियां सजाकर डोले बैंड बाजे एवं भजन-कीर्तन के साथ झोपड़ी वाला मंदिर, दाऊजी महाराज, श्री लक्ष्मी नारायण जी महाराज के मंदिर होते हुए डोले बंद वाली बगीची पहुंचे। जहां भगवान की आरती के पश्चात डोल का समापन हुआ। इस अवसर महा आरती व पूजा-अर्चना कर प्रसादी वितरित की गई। पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु ने शामिल होकर भगवान के दर्शन किए। इस अवसर पर ठाकुर जी को जल विहार करवाया गया। इस दौरान कस्बे वासियों ने शोभायात्रा का पुष्प वर्षा कर जगह जगह स्वागत किया।
पंडित मनोज भारद्वाज ने महत्व के बारे में बताया कि - यह दिन भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता यशोदा ने भगवान श्रीकृष्ण के वस्त्र धोए थे, इसलिए इसे जल झूलनी एकादशी या डोल ग्यारस भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा की जाती है, और इसे परिवर्तनी एकादशी या पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
यह उत्सव भक्ति और परंपरा का एक सुंदर संगम है, जो धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस मौके पर पंडित हनुमान प्रसाद, पंडित भारत भूषण, जगदीश सोनी, सोरभ सोनी, विनोद गप्पी, छोटू बंसल, अनिल बंसल, प्रमोद बंसल, मुकेश बंसल, बिल्लू शर्मा, संतोष साहू, आशा बंसल, सुनीता खंडेलवाल, बीना शर्मा, राघव सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।