आज गूगल गुरू का जमाना - शिक्षक दिवस पर विशेष: सैनी
उदयपुरवाटी (सुमेरसिंह राव) भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक व शिक्षाविद डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस 5 सितम्बर को हम शिक्षक दिवस मनाते हैं किंतु उनसे पहले भी अनेक गुरु भारत में हुए जिन्होंने भारत में ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में देश के नाम को रोशन किया ।गुरु की महिमा को ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है कबीर जी ने कहा गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागू पाय बलिहारी गुरु अपने गोविंद दियो बताए ।मातापिता तो जीवन देते हैं किंतु जीवन को सही दिशा शिक्षक ही देते है शिक्षक हमें ज्ञान के साथ ही अच्छे संस्कार अनुशासन चरित्र निर्माण की शिक्षा ईमानदारी परिश्रम देशभक्ति के मार्ग पर चलना सिखाते हैं ।मनुष्य के जीवन में अनेक रूप में शिक्षक मिलते हैं जैसे आध्यात्मिक गुरु मार्गदर्शक गुरु,अपनी जन्मभूमि के साथ ही संपूर्ण भारत में व विश्व में अपने ज्ञान की गंगा बहाने वाले गुरुओं में विशेष रूप से-
- चाणक्य जो अर्थशास्त्र और राजनीति के महान विद्वान थे चाणक्य नीति आज भी प्रसिद्ध है ।
- गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक उनके द्वारा स्थापित बौद्ध धर्म के अनुयायी आज भी अनेक देशों में हैं ।
- सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका जिन्होंने कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करते हुए दलित शोषित महिलाओं को शिक्षित करने में अपना जीवन लगा दिया ।
- डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक शिक्षक जो भारत के राष्ट्रपति बने और उनके जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
- रविंद्रनाथ टैगोर एक कवि और लेखक जिन्होंने शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में विशेष योगदान दिया आज भी पूरे भारत में उनके नाम से अनेक शिक्षण संस्थाएं हैं ।
- स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक योग व दार्शनिक व्यक्तित्व जिन्होंने भारत के सामाजिक और धार्मिक विचारों को विश्वभर में फैलाया ।
- ए पी जे अब्दुलकलाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति और सादगी की प्रतिमूर्ति जिनको सम्पूर्ण विश्व में वैज्ञानिक व भारत में परमाणु के जनक के रूप में जाना जाता है ।
- इनके अलावा 15 वीं सदी के महान संत और समाजसुधारक कबीरदास,गुरु गोरखनाथ जिन्होंने नाथ संप्रदाय की स्थापना की,गुरु नानक सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम सिख गुरु,आदि शंकराचार्य जो हिन्दूधर्म के महान विद्वान और दार्शनिक जिन्हें आज भी हिंदू धर्म का सर्वोच्च गुरु मानते हैं,मीरा बाई की कृष्ण भक्ति और सूरदास रसखान को कौन नहीं जानता जो जन जन के दिल में समाये हुए हैं ।
- आज गुरु के प्रति वह सम्मान कहाँ है जब गुरु के सामने आते ही चरणस्पर्श के साथ शिष्य कृतार्थ होता था आज तो गूगल व ए आई जैसे अनेक गुरु हो गये हैं ।
ये लेखक के निजी विचार है