श्राद्ध पक्ष पर घरों में पितृ तर्पण के साथ यजमान विद्वान पंडितों के सानिध्य में कर रहे गया में श्राद्ध

Sep 19, 2025 - 13:12
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श्राद्ध पक्ष पर घरों में पितृ तर्पण के साथ यजमान विद्वान पंडितों के सानिध्य में कर रहे  गया  में  श्राद्ध

उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव)
प्रति वर्ष अश्वनी मास कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष रहता है। इस वर्ष 7 सितंबर 2025 भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिया से शुरू हुआ पितृपक्ष जो 21 सितंबर सर्व पितृ अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष रहेगा। वैसे नानक पड़वा को यजमान अपने  नाना, नानी  का श्राद्ध  निकालने के साथ श्राद्ध पक्ष का समापन होगा। श्राद्ध में श्रद्धालु अपने घरों में पितरों का तर्पण कर रहे हैं। वहीं शेखावाटी से बड़ी संख्या में लोग (बिहार) गया जी में गया श्राद्ध कर रहे हैं।
गया श्राद्ध का पितृ तर्पण का विशेष महत्व - भागवत कथा वाचक विद्वान पंडित मालीराम शास्त्री प्रवासी कोलकता निवासी पचलंगी ने बताया कि सभी यजमानों को श्रद्धा के अनुसार श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए। व्यवस्था के अनुसार जीवन में एक बार गया श्राद्ध भी करना चाहिए। पितृ तर्पण में गया श्राद्ध  का विशेष महत्व है। विद्वान पंडित  हनुमान प्रसाद शास्त्री कोलकाता,रविकांत पचलंगी के सानिध्य में मुख्य यजमान पचलंगी के मालीराम शास्त्री, लक्ष्मी देवी, विनोद जोशी पचलंगी,कृष्णा जोशी अपने परिवार जनों के साथ गया श्राद्ध कर रहे हैं। श्राद्ध कार्यक्रम में संदीप जोशी, भारती देवी, प्रमोद जोशी, गरिमा,  मुकेश जोशी, संगम, ज्योति कुमारी, विहान,आराध्या, अवनी, आहना,आर्या पचलंगी  सहित अन्य भी गया श्राद्ध अनुष्ठान में शामिल है।
16 दिन का रहता है मेला - कथा वाचक विनोद जोशी पचलंगी ने जानकारी में बताया कि गया श्राद्ध में 16 दिन का श्राद्ध मेला लगता है। इस मेले में देश के सभी हिस्सों के श्रद्धालु यहां पहुंच कर गया जी में पितरों का तर्पण करते हैं। इस वर्ष भी श्राद्ध पक्ष में शेखावाटी के कई श्रद्धालु गया में पितरों का तर्पण कर रहे हैं। श्राद्ध पक्ष की सर्व पितृ अमावस्या को ज्ञात व अज्ञात पितरों का तर्पण किया जाएगा। नानक पड़वा के साथ 22 सितंबर को श्रद्धा का श्राद्ध मेले का समापन होगा। 
धर्म सभा का हुआ आयोजन - पचलंगी के विद्वान पंडित स्वर्गीय मक्खन लाल जोशी की श्राद्ध  तिथि एकादशी पर गया पीठ के मुख्य आचार्य रामानुजाचार्य के सानिध्य में धर्म सभा का आयोजन हुआ। धर्म सभा में विद्वान पंडितों के द्वारा वेद मंत्रों के साथ पितरों की पूजा अर्चना की गई। वहीं धर्म चर्चा में श्राद्ध को लेकर उपस्थित कथा वाचक मालीराम शास्त्री, विनोद जोशी सहित अन्य के प्रश्नों का उत्तर देते हुए विद्वान पंडितों ने बताया कि गया श्राद्ध के बाद भी श्राद्ध पक्ष में आने वाले अपने पूर्वजों की तिथि को घरों में श्राद्ध कर्म करना चाहिए। विद्वान पंडितों ने यजमानों को शास्त्र संगत वाद विवाद में बताया कि गया श्राद्ध पितरों का तर्पण का अंतिम कार्यक्रम नहीं होता है। श्राद्ध श्रद्धा का स्वरूप है।  पितरों से याचना करते हुए अपने कुल की रक्षा के लिए मन्नत मांगनी चाहिए ना कि उनको अपने धन व यश का घमंड दिखाना चाहिए। पितृ तर्पण में विद्वान पंडितों को भोजन खिलाते समय भी उनमें अपने पूर्वजों की छवि देखनी चाहिए। वर्तमान युग में श्राद्ध  कर्म को एक व्यवस्था मानकर किया जा रहा है यह सही नहीं। क्योंकि पितरों के खुश होने पर ही देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। यह सभी पितरों की तर्पण व तर्पण में कार्य कर रहे विद्वान पंडितों व भोजन करने वाले विद्वान पंडितों के आशीर्वाद से ही संभव होता है। गया जी में 17 दिन के  श्राद्ध  मेले का 22 सितंबर 2025  को नानक पड़वा के साथ समापन होगा।
गया में स्नान कर पितरों का कर रहे हैं तर्पण - श्राद्ध पक्ष में जहां यजमान पवित्र सरोवरों नदी में पितरों का तर्पण कर रहे हैं। वहीं गया श्राद्ध में गया जी में स्नान कर पितरों का तर्पण कर रहे हैं। आध्यात्मिक गुरु मुकेश जोशी पचलंगी ने बताया कि गया जी में स्नान मात्र से ही पितृ प्रसन्न होते हैं। वहां 17 दिन रुक कर पितृ तर्पण का कार्य करने पर पितृ अत्यधिक प्रसन्न होते हैं।

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