स्वरोज़गार की ओर कदम: पाटोंदा की महिलाओं ने सीखा सोया उत्पाद बनाना
अंता (शफीक मंसूरी ) ग्राम पाटूंदा गांव में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत सोया उत्पाद निर्माण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने हाथों से सोया दूध, टोफू (सोया पनीर), सोया नमकीन, सोया मठरी, सोया पकोड़ी, सोया हलवा सहित अन्य उत्पाद बनाना सीखा। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोज़गार के लिए प्रेरित करना तथा सोया आधारित लघु उद्योगों की संभावनाओं से अवगत कराना था। प्रशिक्षण में नई दिल्ली से आए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने तकनीकी, पोषण, विपणन और उद्यमिता से संबंधित जानकारी साझा की।
इस मौके पर उपस्थित डॉ. ओ.एन. तिवारी ने सोया उत्पादों की पौष्टिकता पर ज़ोर देते हुए बताया कि सोयाबीन प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रमुख स्रोत है, जो विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के पोषण के लिए अत्यंत उपयोगी है। डॉ. राजीव कोसिक ने प्रसंस्करण तकनीकों की उपयोगिता पर बात करते हुए बताया कि सही प्रोसेसिंग से उत्पादों की गुणवत्ता, स्वाद और शेल्फ लाइफ में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिससे बाज़ार में उनकी मांग और मूल्य दोनों बढ़ते हैं। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने स्वाद वृद्धि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल पोषण ही नहीं, बल्कि स्वाद और सुगंध भी उत्पाद की बिक्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि हर्ब्स, मसाले और अन्य प्राकृतिक फ्लेवरिंग एजेंट्स का प्रयोग कर सोया उत्पादों को और अधिक आकर्षक और उपभोक्ता केंद्रित बनाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने बाज़ार रणनीति पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि यदि सही तरीके से मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने उत्पादों को स्थानीय ही नहीं, बल्कि बड़े बाजारों में भी बेच सकती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और उपभोक्ता फीडबैक के आधार पर उत्पाद सुधार व मांग सृजन पर बल दिया। डॉ. मीनाक्षी ग्रोवर ने कहा कि सोया आधारित लघु उद्योग महिलाओं के लिए एक व्यावसायिक अवसर बन सकते हैं। इनसे वे घर पर रहकर ही उत्पादन और विक्रय कर सकती हैं, जिससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और जीवन स्तर दोनों में सुधार होगा। कार्यक्रम के दौरान डॉ. डी.के. सिंह ने किचन गार्डनिंग के लाभों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि घर के आसपास ताजी और रासायन-मुक्त सब्जियाँ उगाना न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि यह घरेलू बजट में भी मददगार साबित होता है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. पुष्पेन्द्र शर्मा, डॉ. प्रवेश चौहान और श्री अजय शर्मा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने महिलाओं को सोया उत्पादों को बनाने की तकनीकी प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से सिखाया और हर चरण में मार्गदर्शन प्रदान किया। इनकी सहायता से प्रतिभागियों ने उत्पाद निर्माण की बारीकियाँ सीखी — जैसे कि सोया दूध निकालना, उसे जमाना, पैकेजिंग करना और भंडारण के तरीके। कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं ने प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी और प्रायोगिक बताया। उनका कहना था कि अब वे सीखी गई तकनीकों को अपने घर पर लागू कर, छोटे स्तर पर उत्पादन शुरू करेंगी और स्थानीय बाजार में बेचकर अतिरिक्त आमदनी अर्जित करेंगी।इस प्रकार, यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए एक नई दिशा की ओर कदम सिद्ध हुआ, जिसमें पोषण, तकनीक, स्वरोज़गार और बाज़ार की समझ — चारों को एक मंच पर जोड़कर व्यवहारिक शिक्षा दी गई।

