सिणधरी में होम अष्टमी की धूम: रबारी-देवासी समाज की प्राचीन ऊंट यात्रा का भव्य शुभारंभ

11 पीढ़ियों की विरासत बनी जीवंत

Sep 30, 2025 - 13:50
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सिणधरी में होम अष्टमी की धूम: रबारी-देवासी समाज की प्राचीन ऊंट यात्रा का भव्य शुभारंभ

सिणधरी (बरकत खान) राजस्थान के बालोतरा जिले के सिणधरी गांव में आज होम अष्टमी के पावन अवसर पर अखिल भारतीय रायका-रबारी-देवासी समाज की आराध्य देव जतेश्वर धाम के गादीपति महंत पारसराम जी महाराज के सान्निध्य में 'दिवेल चंन्दा उगरोमणी ऊंट यात्रा' का धूमधाम से शुभारंभ हुआ। यह यात्रा समाज की 11 पीढ़ियों पुरानी जीवंत परंपरा का प्रतीक है, जो पशुपालकों की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करती है और महाशिवरात्रि तक विभिन्न स्थानों पर भक्तों को एकजुट करती रहेगी।महंत पारसराम जी महाराज ने बताया कि यह ऊंट यात्रा रबारी-देवासी समाज के लिए न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि उनकी खानाबदोश जीवनशैली, पशुपालन की कला और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक भी है। "हमारा समाज सदियों से ऊंटों के साथ जुड़ा रहा है, जो मरुस्थल की जीवनरेखा हैं। यह यात्रा हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और भगवान जतेश्वर की कृपा से समृद्धि का संदेश देती है। महाशिवरात्रि तक यह यात्रा विभिन्न गांवों और धामों को स्पर्श करेगी, जहां भक्तों को दर्शन, भजन और सामूहिक हवन का अवसर मिलेगा," उन्होंने कहा। यात्रा का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। सुबह ही जतेश्वर धाम में विशेष पूजा-अर्चना हुई, उसके बाद सज-धजाकर साए हुए ऊंटों की कतारें निकलीं। स्थानीय लोक कलाकारों ने रबारी लोकगीतों और ढोल-मंजीरों की थाप पर नृत्य किया, जबकि महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में चंदन-दीप जलाकर यात्रा को आशीर्वाद दिया। सैकड़ों भक्तों ने यात्रा में भाग लिया, जो सिणधरी से प्रारंभ होकर आसपास के क्षेत्रों की ओर रवाना हुई।रायका-रबारी-देवासी समाज, जो राजस्थान, गुजरात और अन्य राज्यों में फैला है, अपनी क्षत्रिय वीरता और पशुपालन की परंपरा के लिए जाना जाता है। जतेश्वर धाम सिणधरी इस समाज का प्रमुख आस्था केंद्र है, जहां हर वर्ष शिवरात्रि पर विशाल मेला लगता है। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण का संदेश भी देती है, क्योंकि ऊंट मरुधर की संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।समाज के युवा कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह आयोजन समाज में एकता को मजबूत करने का माध्यम बनेगा। "आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसी परंपराएं हमें अपनी विरासत से जोड़ती हैं। हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी भी इसमें भाग ले," एक युवा भक्त ने कहा।यह यात्रा महाशिवरात्रि  तक चलेगी, जिसमें विभिन्न चरणों में भक्तों को शामिल होने का अवसर मिलेगा। समाज के पदाधिकारी अगले चरण की तैयारियों में जुटे हैं, ताकि यह उत्सव और भी भव्य हो।समाज की धरोहर, भक्ति का संगम रबारी-देवासी समाज की यह यात्रा न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि मरुस्थल की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रमाण है।इस अवसर पर देवाराम जी महाराज, कारोबारी दीपाराम जी महाराज तथा समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।

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