गुरु गोरखनाथ से दीक्षा लेने के पश्चात भर्तृहरि अखंड तपस्या में हुए लीन
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
राज ऋषि अभय समाज के विशाल रंगमंच पर पिछले 15 दिन से चल रहे हैं नाटक महाराज भरतरी में अलग-अलग दृश्य के माध्यम से नाटक का सफलतापूर्वक मंचन किया गया जिसे अपार दर्शकों ने काफी श्रद्धापूर्वक देखा और सराहा ।
गुरु गोरखनाथ से दीक्षा प्राप्त करने के पश्चात महाराजा भरतरी हरी अखंड तपस्या में लीन होने के लिए महलों से चले और तिजारा अलवर होते हुए वर्तमान में स्थित भर्तृहरि स्थान पर आकर अखंड तपस्या में लीन हुए आज भी दूर-दूर से लोग श्रद्धा पूर्वक भरतरी बाबा के दर्शन करने के लिए वहां आते हैं और जो भी मनोकामना लेकर आते हैं बाबा की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती है ।
संस्था के युवा एवं यशस्वी महानिदेशक मनोज कुमार गोयल के निर्देशन में सभी कलाकारों ने अपनी प्रभावी कला का प्रदर्शन करते हुए नाटक को सफल बनाया और दर्शकों पर अपनी परिपक्व कला की गहरी छाप छोड़ी । नाटक का समापन आज 18 अक्टूबर 2025 शनिवार को होगा ।

