रूहानियत की अविरल धारा, 78 वां निरंकारी संत समागम
मध्यम मार्ग अपनाते हुए संतुलित जीवन जिए सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज
खैरथल (हीरालाल भूरानी ) सांसारिक जिम्मेदारियां को निभाते हुए ,आध्यात्मिकता को अपनाने से जीवन सहज, सुंदर और सफल बन जाता है सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने 78वे निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन रविवार को उपस्थित विशाल जनसागर को अपने दिव्य प्रवचनो द्वारा मार्गदर्शन प्रदान करते हुए उपरोक्त भाव प्रकट किए इस संत समागम में विश्व भर से आए लाखो को श्रद्धालु जिस प्रकार सद्गुरु के पावन दर्शनो से आत्मविभोर हो रहे है मुर्शीद और मुर्शिद का यह संगम दिव्यता भव्यता और आत्मिकता का अदितिय नजारा है। संतों ने हमेशा अलिप्त भाव से संसार में रहकर परमार्थ के मार्ग को अपनाते हुए संतुलित जीवन जीने की बात कही है जीवन में यदि हम निरंकार परमात्मा की उपस्थिति का एहसास करते हुए कार्य करते हैं तो वह कार्य निर्लेप भाव से सेवा ही हो जाता है।
सदगुरु माताजी ने वैसुधैव कुटुंबकम की भावना का जिक्र करते हुए संत अपने जीवन में आत्मभाव जागृत करके पूरी मानवता के लिए प्रेम धारण करते हैं संत सभी को एक नजर से देखते हुए कोई भी भेदभाव मन में नहीं रखते है और जहां भेदभाव नही वहां नफरत भी नहीं रहती है, रहता है केवल प्रेम । प्रेम देना भी है और स्वीकारना भी है पर वास्तव में प्रेम बांटने के लिए होता है बटोरने के लिए नहीं ।प्रेम वह भाव है जो जितना देते हैं उतना ही मन खुश होता है उसमें वापस पाने की अपेक्षा नहीं रखी जाती है संतों का भाव तो देने का होता है न कि लेने का सदगुरु माताजी के विचारों से पूर्व आदरणीय निरंकारी राज पिता रमित जी ने संत समागम में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि कोई सांसारिक प्रेमी डूब जाता है तो वह अपने प्रेमी को ईश्वर का दर्जा देता है अगर किसी के हृदय में सतगुरु और परमात्मा के प्रति इलाही प्रेम हो तो वह भक्ति बनाकर आनंदित हो उठता है इसके पूर्व हरियाणा के मानवीय मुख्यमंत्री श्री नायक सिंह सैनी ने समागम में पधार कर सतगुरु के आशीष प्राप्त किया अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन आत्म मंथन आत्म सुधार एवं समाज निर्माण क का प्रेरणा स्रोत है।
कायरौप्रैक्टिक शिविर एवं स्वास्थ्य मिशन के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा संत समागम में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी व्यापक प्रबंध किया गया है समागम परिसर में8 एलोपैथिक तथा 6 होम्योपैथिक डिस्पेंसरी की सेवन निरंतर जारी रही, कायरोरौप्रैक्टिस शिविर में अमेरिका एवं यूरोप के7 डॉक्टर एवं भारत से 4डॉक्टर की टीम समागम के दौरान सेवारत रही । समागम परिसर में चार स्थानों पर ( लंगर) की व्यवस्था की गई ।