प्राचीन धरोहरों का संरक्षण करें जैन समाज - मुनि श्री पावन सागर जी महाराज
गायत्री नगर में सिद्धचक्र महामंडल विधान में सिद्धों के गुणों के1028 अर्घ्य चढे
जयपुर (कमलेश जैन) दिगंबर जैन मंदिर प्रबंध समिति गायत्री नगर, महारानी फार्म, जयपुर के तत्वाधान एवं श्री आदिनाथ महिला मंडल द्वारा परम पूज्य मुनि श्री पावन सागर जी महाराज मुनि श्री सुभद्र सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में प्रातः 7.30 बजे शान्ति धारा सोधर्म इन्द्र एडवोकेट विमल कुमार जैन बाकलीवाल परिवार द्वारा करने के पश्चात सिद्ध चक्र महामंडल विधान मंडल पर सभी इन्द्र इन्द्राणियों ने सिद्धों के गुणों की आराधना करते हुए भक्ति के साथ 512 मंडल किये। कुल 1018 अर्घ्य चढाये गये।
महिला मंडल की प्रचार मंत्री अनिता बड़जात्या ने अवगत कराया कि सिद्ध चक्र महामंडल विधान के पांचवें दिन बच्चों को लोकान्तिक देव व अष्ट कुमारियां तैयार कर शानदार भक्ति करायी व नित्य नियम की पूजा करवायीं। इस कार्यक्रम की सभी ने सराहना की।
इस अवसर पर परम पूज्य मुनि श्री पावन सागर जी महाराज ने अपने मंगल आशीर्वचन में कहा कि जैन समाज को प्राचीन धरोहरों का संरक्षण करना चाहिए, उन्होंने अपने मंगल आशीर्वचन में जैन समाज के ऊपर हुए अत्याचारों के सम्बन्ध में अनेकों संस्मरण सुनाये। पूज्य मुनि श्री ने बहरोज जिला अलवर में स्थित प्राचीन धरोहरों व मन्दिरों के संरक्षण व विकास के लिए समाज को सहयोग करना चाहिए।
इस अवसर पर मन्दिर प्रबन्ध समिति के उपाध्यक्ष अरुण कुमार शाह व महिला मंडल की ओर से बीना टोंग्या राष्ट्रीय महामंत्री व रेखा झांझरी पुलक मंच से अतिथियों ,सोधर्म इन्द्र परिवार व विधानाचार्य का स्वागत किया। सभी मांगलिक क्रियाए प्ं. अजित जी शास्त्री गायत्री नगर महारानी फार्म जयपुर द्वारा कराई गई।