अंता उपचुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीतः भाया ने भाजपा के मोरपाल सुमन को 15594 हजार वोटों से हराया; नरेश मीणा तीसरे पर रहे
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जुली सचिन पायलट, अशोक चांदना, शांति धारीवाल, यह रहे जीत के किंगमेकर
अंता (शफीक मंसूरी ) अंता विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया जीत गए। उन्होंने भाजपा के मोरपाल सुमन को 15594 वोटों से हराया। निर्दलीय नरेश मीणा तीसरे नंबर पर रहे। इससे पहले निर्दलीय नरेश मीणा काउंटिंग सेंटर के बाहर काफी निराश नजर आए थे। वो समर्थकों के बीच जीप पर चढ़कर बैठ गए थे। वहीं, प्रमोद जैन भाया के समर्थकों में खुशी का माहौल है।अंता के नतीजों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि - वो जनता का आदेश स्वीकारते हैं। वहीं, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने भाया को जीत की बधाई दी
हार के बाद निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने कहा- जनता ने जो प्यार-आशीर्वाद दिया, उसके लिए सिर झुकाता हूं। हमारी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ थी। ईमानदारी हार गई-भ्रष्टाचार जीत गया। समर्थकों से कहा- ईश्वर हमारी परीक्षा ले रहा है, हमारी त्याग-तपस्या में शायद कोई कमी रही होगी। अब हमें दोगुनी ताकत से काम करना पड़ेगा।
नरेश मीणा निराश नजर आए 17 राउंड की मतगणना के बाद बाद निर्दलीय कैंडिडेट नरेश मीणा अपने समर्थकों के बीच पहुंचे। वो काफी निराश नजर आए।
कांग्रेस प्रत्याशी की पत्नी बोलीं-बारां हमारा परिवार
कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया की पत्नी और बारां जिला प्रमुख उर्मिला जैन समर्थकों के बीच पहुंचीं। उन्होंने कहा कि पूरा बारां हमारा परिवार है और जहां परिवार होता है वहां कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं होता। जनता ने इस चुनाव में कांग्रेस और भाया को ही अपना विश्वास दिया है। उर्मिला जैन ने कहा कि उन्होंने आज तक ऐसा चुनाव नहीं देखा। लोकतंत्र में चुनाव होते रहते हैं, लेकिन इस बार हमारे लिए अमर्यादित भाषा का उपयोग किया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
भाया के कार्यालय में खुशी में समर्थक झूम उठे| कांग्रेस कैंडिडेट प्रमोद जैन भाया के अंता चुनावी कार्यालय में भी कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है।
भाया बोले- भाजपा ने जनता के साथ किया धोखा
काउंटिंग के बीच कांग्रेस कैंडिडेट प्रमोद जैन भाया ने कहा- उन्हें जनता पर पूरा विश्वास है। भाजपा ने अपने कार्यकाल में लोगों के साथ धोखा किया है। गहलोत सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को कम करने और बंद करने का काम किया गया, जिससे बारां में विकास कार्य प्रभावित हुए।
किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा भी नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि दुष्यंत के सामने मैंने और मेरी पत्नी ने भी चुनाव
लड़ा है।इसके अलावा कई बड़े नेताओं के खिलाफ भी चुनाव लड़े, लेकिन कभी किसी के प्रति अमर्यादित भाषा का उपयोग नहीं किया।भाया ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही किसी को प्रतिद्वंद्वी नहीं माना -जनता हमेशा उनके साथ खड़ी रही है।
प्रमोद जैन भाया के समर्थकों में उत्साह
बारां के श्रीजी चौक में कांग्रेस कैंडिडेट प्रमोद जैन भाया के घर के बाहर भी भीड़ बढ़ने लगी है। काउंटिंग में कांग्रेस की लीड बढ़ने के साथ भाया को बधाई देने वाले पहुंचने लगे हैं। वे कुछ देर के लिए घर से बाहर निकले तो समर्थक उनके पैर छूते नजर आए।
अंता–मांगरोल विधानसभा उपचुनाव में प्रमोद जैन भाया की ऐतिहासिक विजय पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
यह जीत कांग्रेस की रीति-नीतियों में जनता के अटूट विश्वास, भाया के सरल स्वभाव, उनकी सेवा भावना और समर्पण के संकल्प, कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत, और अंता–मांगरोल की जागरूक जनता की जीत है।
आप सभी के आशीर्वाद, समर्थन और भरोसे के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद अंता–मांगरोल
अंता विधानसभा उपचुनाव
आखिर मुख्यमंत्री भजनलाल पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, सांसद दुष्यंत सिंह, सहित भाजपा के 40,मंत्री विधायक नहीं जीता पाए भाजपा के मोरपाल सुमन को पूर्व उपमुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया सांसद दुष्यंत सिंह अपने पसंदीदा उम्मीदवार मोरपाल सुमन को नहीं जीता पाए हारने के कई फैक्टर स्थानीय नेताओं में फूट भाजपा कई गुटों में बटी
अंता विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया को परास्त करने के लिए भाजपा को कभी राजनीति के भीष्म पितामह स्वर्गीय रघुवीर सिंह कौशल को मैदान में उतरना पड़ा तो कभी जातिगत समीकरणों के आधार पर भाजपा के कद्दावर नेता प्रभुलाल सैनी को तो, कभी इसी आधार पर सामान्य सीट पर मनोहरथाना से कंवरलाल मीणा को लेकर इस चुनावी समर में उतरना पड़ा।लेकिन कांग्रेस नेता भाया के आभा मंडल के आगे वर्ष 2008 के चुनाव में रघुवीर सिंह कौशल लगभग 29 हजार 668 वोटों से पराजय मिली तो इसके बाद भाजपा ने जातिगत वोटबैंक के बल चुनाव मैदान में वसुन्धरा राजे के विशेष सिपाहसलार रहे प्रभूलाल सैनी को उतारा और सैनी 3399 वोटो से अपनी इज्जत बचा पाए, मगर वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता भाया ने फिर से 34 हजार 63 वोटो से विजय प्राप्त कर जातिवाद की हवा निकाल दी। इसके बाद वर्ष 2023 के तत्कालीन विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से वसुन्धरा राजे के करीबी नेता कंवर लाल को मैदान में उतारना पड़ा और वह 5861 मतों से जीत तो गए, लेकिन अपने न्यायालयी प्रकरण के कारण अंता विधानसभा क्षेत्र में मध्यावधि चुनाव का आधार तैयार कर गए। इन सब चुनावों के मध्य जब-जब भी लोकसभा के चुनाव आए भाजपा ने अपने इस राजनैतिक गढ़ बने क्षेत्र में 30000 की लीड को कवर किया है। ऐसे में वर्तमान मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस ने जहां अपने विश्वस्त योद्धा प्रमोद जैन भाया को पुनः मैदान में उतार कर नामांकन के दिन से ही चुनावी चौसर पर अपना खेल प्रारंभ कर दिया था, वहीं अन्तकलह में फंसी भाजपा जहां तय समय पर कांग्रेस नेता भाया के विरुद्ध प्रत्याशी ही तय नहीं कर पाई तो इधर क्षेत्र हवा हवाई प्रत्याशियों के विरुद्ध मोर्चा खोल कर स्थानीय प्रत्याशी की मांग को लेकर अड़ कर बैठ गया और अंत में पशोपेश में फंसी भाजपा को फिर से जातिवाद के जहाज पर बैठ कर पार उतरने का प्रयास कर रही है।यहीं नही भाजपा का सुदृढ़ गढ़ रहा यह अंता-मांगरोल क्षेत्र कांग्रेस प्रत्याशी भाया के भय से इतना भयभीत हुआ कि उसे बिते दो चुनावों में भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की आम सभाएं यहां करवानी पड़ी। वर्तमान राजनीति जो जातिवाद की जंजीर से जकड़ी हुई है जिसके आगे राष्ट्रवाद भी गौण हो चुका है, जिसने सामान्य सीट पर पिछड़ा वर्ग और एसटी वर्ग के प्रत्याशियों का आधिपत्य स्वीकार कर लिया है, उस सीट पर भाजपा ने अपने प्रत्येक जातिवादी स्टार प्रचारक को प्रचार के लिए मैदान में उतार दिया है, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी बिना किसी जातिगत आधार के विकास के अपने नारे के आधार पर अपना दृष्टिकोण प्रकट कर रहा है। जिस पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह ने इस क्षेत्र का अपना आधिपत्य सिद्ध करते हुए यहां सरकार बनने के दो वर्ष तक राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को नहीं आने दिया, यहां तक कि झालावाड़ जिलें के पिपलौदी हादसे तक के समय ईशारों-इशारों में यह कहकर मुख्यमंत्री का दौरा रद्द करवा दिया कि यह हमारे घर का मामला है इसमें बाहरी लोग हस्तक्षेप नहीं करें, ऐसे में अब अंता के इस उपचुनाव में पूर्व वसुंधरा राजे और दुष्यंत सिंह चुनावी चक्रव्यूह में फंस कर अपने तेवर ढ़ीले करने को मजबूर हो गए हैं।
उपचुनाव प्रभारी बने सांसद दुष्यंत सिंह लगातार क्षेत्र में बने हुए हैं और खुद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी बिते दिनों से युद्ध स्तर पर कार्यकर्ताओं की बैठकें कर रही है और गुरूवार को मुख्यमंत्री भजनलाल का मार्ग दर्शन कार्यक्रम भी आयोजित करवा दिया है।
भ्रष्टाचार के आरोप को जनता ने नकारा
प्रमोद जैन भाया को खनिज विभाग के भ्रष्टाचार के आरोपों को गृहमंत्री अमित शाह द्वारा सम्मान देकर मिली क्लीन चिट बीजेपी, निर्दलीय प्रत्याशी भाया के भ्रष्टाचार पर वोट मांग रहे हैं वही प्रमोद जैन भाया विकास 36 काम के नाम पर वोट मांग रहा है
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अंता में निजी रेस्टोरेंट पर प्रेस वार्ता में पत्रकारों थमाए प्रेस नोट पत्रकारों से रूबरू पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया पर लगाया भ्रष्टाचार के और कहा कि अपने ही विधायक दिवंगत भरत सिंह ने राजेंद्र गुड़ा ने भ्रष्टाचार के आरोप, प्रेस वार्ता में दैनिक बढ़ता राजस्थान संवाददाता ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के आरोप पर सवाल पूछते हुए कहा केंद्र में भाजपा की सरकार होते हुए
खान मंत्री प्रमोद जैन भाया को मिला राष्ट्रीय खनिज विकास पुरस्कार
दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राष्ट्रीय खनिज विकास पुरस्कार प्रदान किया जिस सवाल पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बढ़ता राजस्थान संवाददाता के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा प्रमोद जैन भाया को पुरस्कार दिया गलत या सही इसका जवाब-बार पूछने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया संवाददाता ने पूछा जब भ्रष्टाचार को गृहमंत्री द्वारा पुरस्कार दिया गया वहीं प्रमोद जैन भाया को गृह मंत्री ने पुरस्कार देखकर क्लीन चिट दे दी गई, अंता उपचुनाव में बीजेपी और निर्दलीय प्रमोद जैन भाया के भ्रष्टाचार के नाम से वोट मांग रहे हैं वही प्रमोद जैन भाया विकास और 36 कौम के नाम पर वोट मांग रहे है
प्रेस वार्ता के बाद सांसद दुष्यंत सिंह ने से कहा कि गृह अमित शाह द्वारा जो सम्मान दिया गया वह पूर्व खान मंत्री प्रमोद जैन भाया को नहीं दिया खनिज विभाग को दिया गया है
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अंता में निजी रेस्टोरेंट पर प्रेस वार्ता में पत्रकारों थमाए प्रेस नोट पत्रकारों से रूबरू हुए अपनी सरकार के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार के बखान करते हुए कहा कि 18 महीने का कार्यकाल जनसेवा, सुशासन और विकास का स्वर्णिम अध्याय सिद्ध हुआ है
- अंता उपचुनाव के परिणाम ने चौंकाया: इन 5 वजहों से हारे BJP के मोरपाल सुमन; तीसरे स्थान पर रहे नरेश मीणा
राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद जैन भाया ने 15594 मतों से धमाकेदार जीत हासिल की। होम वोटिंग समेत 20 राउंड की मतगणना के बाद भाया को 69462 वोट मिले, जबकि भाजपा के मोरपाल सुमन 53868 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर सिमट गए। निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को 53740 वोट मिले। 925 मतदाताओं ने 'NOTA' विकल्प का इस्तेमाल किया।
यह हार भाजपा के लिए बड़ा झटका है, खासकर हाड़ौती क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशों को देखते हुए। उपचुनाव पूर्व भाजपा विधायक कंवर लाल मीणा की आपराधिक सजा के कारण अयोग्यता से रिक्त हुई सीट पर हुआ था। यहां 80% से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं की सक्रियता को दर्शाता है।
भाजपा ने भजनलाल सरकार के कामकाज पर वोट मांगे, लेकिन पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की सक्रियता के बावजूद पार्टी फ्रंटफुट पर नहीं खेल पाई। अब सवाल उठ रहा है कि जनता ने भाजपा को क्यों नकारा और वोटों की शिफ्टिंग की बड़ी वजह क्या रही?मोरपाल सुमन की हार के पीछे पांच मुख्य वजहें प्रमुखता से सामने आ रही हैं, जो भाजपा की रणनीति और स्थानीय मुद्दों की कमजोरी को उजागर करती हैं।
1. वोट विभाजन से त्रिकोणीय मुकाबला
कांग्रेस के बागी निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा ने मीणा समुदाय के वोटों को बुरी तरह बांट दिया। एग्जिट पोल में मीणा को 33% समर्थन मिलने का अनुमान था, जिसने भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक को चूर-चूर कर दिया। पहले यह सीट कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर की थी, लेकिन नरेश मीणा ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया। मीणा के वोटों ने भाजपा को सीधे नुकसान पहुंचाया, क्योंकि मीणा समुदाय हाड़ौती में प्रभावशाली है। इससे भाजपा की जीत की राह अवरुद्ध हो गई।
2. पूर्व विधायक की अयोग्यता का दाग
कंवर लाल मीणा की 2005 के आपराधिक मामले में सजा और अयोग्यता ने भाजपा की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया। मतदाताओं में गुस्सा था कि पार्टी ने ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया, जिसके कारण सीट खाली हुई। इससे स्थानीय विकास कार्य ठप हो गए। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाकर हमला बोला, आरोप लगाया कि भाजपा ने जनता की अनदेखी की। यह दाग भाजपा के प्रचार को कमजोर करता रहा और वोटरों में नकारात्मक भावना पैदा की।
3. सुमन की कमजोर स्थानीय अपील
भाजपा ने वसुंधरा राजे के करीबी मोरपाल सुमन को स्थानीय चेहरा बताकर मैदान में उतारा। सुमन ने खुद को किराना दुकानदार की सादगी से पेश किया और भाया व मीणा को 'बाहरी' कहा। लेकिन उनकी अपील मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाई। वहीं, तीन बार विधायक रह चुके भाया के विकास कार्य- सड़कें, सिंचाई परियोजनायों ने उन्हें मजबूत बनाया। सुमन की स्थानीय जुड़ाव की कमी ने भाजपा को बैकफुट पर धकेल दिया।
4. कांग्रेस की आक्रामक प्रचार रणनीति
कांग्रेस ने अंतिम चरण में जोरदार प्रचार किया। पूर्व सीएम अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली और अशोक चांदना जैसे नेताओं ने रैलियां कीं। उन्होंने भाया के खिलाफ भाजपा के 'राजनीतिक मामलों' को खारिज किया और जातिगत समीकरण (गुर्जर-माली) को संतुलित रखा। भाजपा का फोकस माइक्रो-मैनेजमेंट पर फिसल गया, जबकि हाड़ौती में वोटर सेंटिमेंट कांग्रेस के पक्ष में शिफ्ट हो गया। वसुंधरा राजे की जमीन पर मेहनत के बावजूद कांग्रेस की एकजुटता भारी पड़ी
5. मतदाताओं में असंतोष और क्षेत्रीय मुद्दे
बता दें, 80% मतदान के बावजूद बेरोजगारी, पानी की कमी और किसान समस्याओं पर भजनलाल सरकार की विफलता ने असंतोष बढ़ाया। नरेश मीणा की 2024 देवली उपचुनाव में SDM पर थप्पड़ मारने की घटना और गिरफ्तारी ने उन्हें 'लड़ाकू' नेता की संज्ञा दी, जो युवाओं को आकर्षित किया।
भाजपा की आंतरिक कलह भी वोटरों तक पहुंची। भाया के भ्रष्टाचार मामलों को भाजपा ने उठाया, लेकिन जनता ने इसे नजरअंदाज कर दिया। कुल मिलाकर, यह हार भाजपा को हाड़ौती में सबक देती है। पार्टी को स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार चयन और एकता पर फोकस करना होगा। कांग्रेस की जीत भाया की मजबूती और भाजपा की कमजोरियों का प्रमाण है।