सहायक आचार्य सरस्वती मीना को मिली डॉक्टरेट की उपाधि, समकालीन साहित्य में दिया महत्वपूर्ण शोध योगदान
खैरथल (हीरालाल भूरानी) प्राचार्य डॉ. नीतू जेवरिया ने बताया कि राजकीय महाविद्यालय खैरथल के अंग्रेज़ी संकाय में सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत सरस्वती मीना (पुत्री श्री शिवराम मीना, ग्राम चांदेरा, तहसील सिकराय, जिला दौसा), जो इससे पहले वे सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर पद पर रह चुके हैं, ने शैक्षणिक क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है। उन्हें राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के अंग्रेज़ी विभाग डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई है।
उनका शोध कार्य पर्यावरणीय आलोचना (साहित्य में प्रकृति, पर्यावरण और मनुष्य–प्रकृति संबंधों के अध्ययन) तथा पारिस्थितिक नारीवाद (स्त्री और प्रकृति पर होने वाले दोहरे शोषण के विश्लेषण) पर आधारित है। इस अध्ययन में उन्होंने पर्यावरणीय चेतना, मनुष्य–प्रकृति संबंध, पर्यावरणीय अन्याय और साहित्य में प्रकृति के चित्रण जैसे समकालीन विषयों का विस्तृत और गंभीर विवेचन प्रस्तुत किया है।
पारिस्थितिक नारीवाद के माध्यम से उन्होंने यह भी प्रतिपादित किया है कि किस प्रकार सामाजिक, आर्थिक और सत्ता संरचनाओं में स्त्री और प्रकृति दोनों के शोषण की समान प्रक्रियाएँ विद्यमान रहती हैं। उनके शोध से आधुनिक भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य में पर्यावरणीय विमर्श को नई दिशा प्राप्त होती है और प्रकृति–स्त्री–समाज के त्रिकोणीय संबंधों को समझने के लिए एक प्रभावी वैचारिक परिप्रेक्ष्य विकसित होता है।
उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है। महाविद्यालय के शिक्षकों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों तथा क्षेत्रवासियों ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की है।