पांच वर्ष से संचालित है सीएचसी में इमरजेंसी में नहीं मिलता इलाज: मजबूरन नीम हकीमों से इलाज कराने को मजबूर हैं लोग
रामगढ़ (राधेश्याम गेरा) उपखण्ड क्षेत्र के कस्बा अलावडा में छः वर्ष पूर्व पीएचसी को सीएचसी क्रमोन्नत कर दिया। लेकिन तत्कालीन सरकार और वर्तमान सरकार ने सीएचसी पर रोगियों के लिए सुविधाएं देने पर ध्यान ही नहीं दिया।
दुर्घटना से इमरजेंसी में आए रोगियों को इलाज ही नहीं मिल पाता। उन्हें बिना एडमिट किए रामगढ़ अलवर भेज दिया जाता है। मंगलवार रात बारह बजे के लगभग कस्बे की एक महिला भारती को बेहोशी की हालत में अलावडा सीएचसी लाया गया। वंहा ड्यूटी पर कोई डाक्टर नहीं मिला। केवल स्टाफ मिला। मौके पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ता शशीकांत शर्मा ने वंहा मौजूद मेलनर्स से पूछा कि ड्यूटी किस डाक्टर की है। मेलनर्स ने कहा कि मुझे नहीं मालूम मैं तो शाम को आया हूं। और इलाज भी नहीं किया और कह दिया कि यंहा डाक्टर नहीं है रामगढ़ ले जाओ। शशीकांत शर्मा ने इस बारे में मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी को दूरभाष पर अवगत कराया तो जवाब में कहा कि कार्यवाही ब्लाक चिकित्सा अधिकारी करेगा। उसके बाद शशीकांत शर्मा ने ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ अमित राठौड़ को अवगत कराया।तब जाकर मौजूद मेलनर्स ने रैफर स्लिप बना कर दी । उसके बाद बेहोश महिला भारती को रामगढ़ सीएचसी ले जा कर उपचार कराया।
गौर तलब है कि अलावडा सीएचसी पर केवल ओपीडी के समय में ही रोगियों का उपचार किया जाता है। वह भी अनुमान से या बीपी और शुगर जांच के साथ। यंहा सीएचसी में रक्त की जांच के लिए सीबीसी मशीन ही उपलब्ध नहीं है और ना ही एक्स-रे मशीन उपलब्ध है।
इस बारे में ब्लाक चिकित्सा अधिकारी डॉ अमित राठौड़ से बात की तो उन्होंने कहा कि सीएचसी पर स्टाफ मिला था डाक्टर नहीं मिला। मैंने सीएचसी प्रभारी को पाबंद किया है कि सीएचसी पर एक जरूर रहना चाहिए।