भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) विश्व मृदा दिवस के अवसर पर भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय की नोडल एजेन्सी मैनेज, हैदराबाद के दिशा-निर्देशानुसार राज्य कृषि प्रबंध संस्थान, दुर्गापुरा, जयपुर के माध्यम से संचालित एक वर्षीय देसी (DAESI) डिप्लोमा कार्यक्रम का शुभारम्भ शुक्रवार को नोडल प्रशिक्षण संस्थान, कार्यालय उप निदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक (आत्मा), कृषि विभाग, भरतपुर पर किया गया।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि अतिरिक्त निदेशक कृषि देशराज सिंह रहे। उन्होंने कहा कि आदान विक्रेता किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित उचित मात्रा में ही कृषि आदान उपलब्ध कराएं, जिससे किसानों की लागत कम हो और उत्पादन में लाभ बढ़े। उन्होंने आदान विक्रेताओं को किसान और विभाग के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए ईमानदारी व नैतिक मूल्यों के साथ टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि संयुक्त निदेशक कृषि सुरेश चन्द गुप्ता, उप निदेशक उद्यान जनकराज मीणा तथा सहायक निदेशक कृषि राधारमन शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदान विक्रेता केवल व्यापार की मानसिकता से न चलें, बल्कि मानव कल्याण, प्रकृति संरक्षण और सतत कृषि को ध्यान में रखते हुए तकनीकी ज्ञान को बढ़ाएं। उन्होंने संस्तुत मात्रा, समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन एवं कृषि तकनीक की सटीक जानकारी को आवश्यक बताया।
उप परियोजना निदेशक (आत्मा) कृषि विभाग अमर सिंह ने कहा कि बिना तकनीकी जानकारी के अनावश्यक कृषि आदान बेचे जाने से प्राकृतिक पर्यावरण, लाभकारी सूक्ष्म जीव एवं शुद्ध खाद्यान पर दुष्प्रभाव पड़ता है। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो भूमि की उर्वरता पर गंभीर संकट आ सकता है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए विभाग एवं संबंधित सभी आयामों को और मजबूत व नवाचारी बनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में बताया गया कि यह डिप्लोमा कुल 48 सप्ताह( प्रत्येक रविवार) का है, जिसमें 40 कक्षाएं तथा 08 कृषि तकनीकी भ्रमण शामिल हैं। उद्घाटन समारोह में पंचम बैच के फैसिलिटेटर औंकर सिंह एवं सहायक कृषि अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे।