किसानों को दी जैविक खेती की जानकारी: तिलहन योजना कार्यशाला में बीज उपचार का महत्व बताया
गोविंदगढ़ (अलवर) के रामबास में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल–तिलहन योजना के तहत एक ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें क्षेत्र के कई किसानों ने भाग लेकर आधुनिक खेती तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।
जैविक खेती से होते है दीर्घकालिक लाभ
सहायक कृषि अधिकारी मामराज खाती ने किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता घट रही है, इसलिए जैविक खेती अपनाना समय की मांग है। जैविक खेती से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक लाभ भी प्राप्त होता है।
कृषि पर्यवेक्षक रवि सैनी ने सरसों की वैज्ञानिक खेती पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित खाद और जल प्रबंधन से उत्पादन में वृद्धि के तरीके बताए। सैनी ने किसानों को फसल बीमा सहित विभिन्न विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के लिए समय पर आवेदन करना महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में बीज उपचार के महत्व पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि बीज उपचार फसल सुरक्षा की पहली कड़ी है, जिससे रोगों से बचाव होता है और अंकुरण में वृद्धि होती है। एफपीओ बोर्ड के डायरेक्टर मनीराम सैनी ने सरसों की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए विभिन्न शस्य, मैकेनिकल और रासायनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने खरपतवारनाशक रसायनों की मात्रा और उपयोग के समय के महत्व पर जोर देते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी।
उद्यानिकी फसलों को अपनाने की सलाह दी
किसानों को उद्यानिकी फसलों को अपनाने की भी सलाह दी गई। उन्हें फलोद्यानों की स्थापना, बूंद-बूंद सिंचाई, फव्वारा सिंचाई, मिनी फव्वारा सिंचाई, ग्रीन-हाउस, नेट-हाउस, लो-टनल, मल्चिंग और सोलर पंपसेट स्थापना जैसी योजनाओं के आवेदन प्रक्रिया के बारे में बताया गया