स्वस्थ मृदा-स्वस्थ जन सेवर में विश्व मृदा दिवस पर विविध गतिविधियाँ आयोजित
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, सेवर में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। खाद्य और कृषि संगठन एफएओं रोम, इटली के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह आयोजन प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम अच्छे शहरों के लिए अच्छी मृदाएं पर केंद्रित रही, जिसमें शहरी एवं ग्रामीण दोनों स्तरों पर बेहतर मृदा प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. विजय वीर सिंह ने की। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मृदा का स्वास्थ्य सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ा है। अतः कृषकों को रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करते हुए जैविक खादों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि मृदा की गुणवत्ता और पोषक तत्वों का स्तर बना रहे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी से स्वस्थ अनाज और अंततः स्वस्थ समाज का निर्माण होता है।
संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राम स्वरूप जाट ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से मृदा सुधार की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं उन्नयन हेतु कई नवाचार और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनका लाभ किसान लगातार उठा रहे हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार मीना ने मृदा परीक्षण की उपयोगिता बताते हुए कहा कि किसान यदि मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करें तो लागत कम होने के साथ उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।
डॉ. मोहन लाल दौतानिया ने दीर्घकालिक एवं टिकाऊ कृषि उत्पादन के लिए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के उपायों पर प्रकाश डाला, वहीं डॉ. मुरलीधर मीना ने मृदा कार्बन बढ़ाने को अत्यंत आवश्यक बताया, जिससे फसल पैदावार में निरंतर वृद्धि संभव हो सके। कार्यक्रम के अंत में वैज्ञानिक-किसान संवाद आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. रामलाल चौधरी, डॉ. वासुदेव मीना और डॉ. हरवीर सिंह ने किसानों की फसल संबंधी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया। इस सफल आयोजन का संचालन एवं संयोजन डॉ. मोहन लाल दौतानिया, डॉ. मुकेश कुमार मीना एवं डॉ. मुरलीधर मीना द्वारा किया गया।