शहर के सबसे व्यस्त टंकी तिराहा पर बदहाली का मंज़र: जान जोखिम में डाल रहे राहगीर, अधिकारियों की आँखें बंद
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक टंकी तिराहा, इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति के कारण चर्चा में है। यह तिराहा न केवल शहर के आंतरिक हिस्सों को जोड़ता है, बल्कि लगनशाह हॉस्पिटल, जुसरी मार्ग और मालियों की ढाणी जैसे महत्वपूर्ण गंतव्यों की ओर भी जाता है। मुख्य मार्ग होने के बावजूद यह सड़क पिछले कई वर्षों से जलभराव और विशाल गड्ढों के कारण नरक बनी हुई है।
लापरवाही की जड़: जलदाय विभाग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की इस दयनीय स्थिति का मुख्य कारण जलदाय विभाग की छोटी सी, मगर वर्षों पुरानी, लापरवाही है। पानी की लगातार लीकेज और जमाव के चलते सड़क पूरी तरह से धंस गई है, और यहाँ बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जैसा कि तस्वीर में साफ़ देखा जा सकता है।
आवागमन बाधित, दुर्घटनाओं का अड्डा
यह तिराहा दिन भर वाहनों की आवाजाही से भरा रहता है। गड्ढों और कीचड़ के कारण यहाँ से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
दुर्घटनाएं: स्थानीय लोगों के अनुसार, गड्ढों के कारण आए दिन छोटे-मोटे एक्सीडेंट होते रहते हैं। दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और गिरने की घटनाएं आम हैं, जिसके कारण कई राहगीर चोटिल हो चुके हैं।
जाम और विवाद: जलभराव वाले रास्ते से निकलने की जद्दोजहद में आवागमन बाधित होता है, जिससे लंबा जाम लगता है और लोग आपस में उलझते भी हैं।
लोगों में आक्रोश: चुप्पी क्यों?
हैरानी की बात यह है कि स्थिति की गंभीरता के बावजूद, जलदाय विभाग और नगर परिषद दोनों की आँखें इस गंभीर समस्या पर बंद हैं। व्यस्त मार्ग पर जानलेवा गड्ढों के बावजूद किसी भी अधिकारी ने अब तक इसका संज्ञान नहीं लिया है।
स्थानीय निवासी व आसपास के दुकानदारों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, यह सिर्फ़ एक गड्ढा नहीं, बल्कि अधिकारियों की लापरवाही का प्रमाण है। क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है, तभी उनकी नींद खुलेगी?
मांग: तुरंत समाधान की ज़रूरत
शहर की जनता और राहगीरों ने उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह अति आवश्यक है कि जलदाय विभाग अपनी लीकेज की समस्या को तुरंत सुधारे और नगर परिषद इस व्यस्त मार्ग की सड़क की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू करे, ताकि शहर के लोगों को इस रोजमर्रा के जोखिम से मुक्ति मिल सके।
आगे की राह: अब देखना यह होगा कि क्या यह रिपोर्ट और बदहाली की यह तस्वीर प्रशासन की आँखें खोलती है या 'टंकी तिराहा' पर लोगों का जोखिम भरा सफ़र जारी रहता है।