ये कैसा ग्रेप-4; निर्माण कार्यों पर रोक फिर भी अवैध खनन के लिए धड़ले से चल रहे है क्रेशर
खैरथल ( हीरालाल भूरानी ) दिल्ली और एनसीआर में वायु गुणवत्ता में आई अचानक गिरावट के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एक सप्ताह पहले ग्रेप-4 को लागू कर दिया था। एनसीआर क्षेत्र खैरथल- तिजारा जिले में भी ग्रेप-4 के चलते सभी तरह के निर्माण कार्यों पर सख्ती से रोक लगा दी गई थी। लेकिन खैरथल-तिजारा जिले में वायु प्रदूषण को देखते हुए लागू ग्रेप-4 के बावजूद नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
क्रेशरों से भरे ओवरलोड ट्रैक्टर और डंपर बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर बेखौफ दौड़ते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि जब जिले में ग्रेप-4 की सख्त पाबंदी लागू है, तो फिर यह अवैध परिवहन किसके संरक्षण में चल रहा है..? ग्रेप-4 के तहत खनन, निर्माण और भारी वाहनों पर रोक के आदेश केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। धरातल पर हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। दिन-रात पत्थरों से भरे ट्रैक्टर-डंपर सड़कों पर दौड़ रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
बैठकें सिर्फ फाइलों में, सख्ती नदारदः
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ग्रेप-4 की सख्ती से पालना कराने के लिए की गई बैठकों का असर जमीनी स्तर पर कहीं नजर नहीं आ रहा। ऐसा प्रतीत होता है कि सब कुछ पहले से सेट है। नियमों को ताक पर रखकर क्रेशरों से निर्माण स्थलों तक पत्थर पहुंचाए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय खैरथल सहित मुण्डावर और किशनगढ़ बास क्षेत्र में पत्थरों का पिसा हुआ डेस्ट व पत्थरों से भरे ओवरलोड बिना नंबर प्लेट ट्रैक्टर-डंपर दिन के उजाले में खुलेआम दौड़ते नजर आ रहे है। जब प्रशासन ने क्रेशर और माइनिंग पर सख्ती से रोक लगा दी ।


