कृषि आदान विक्रेता बनें 'प्रशिक्षित सलाहकार', नौगांवा KVK में DAESI बैच-7 का भव्य आगाज
नौगांवा (अलवर) राधेश्याम गेरा । कृषि विज्ञान केंद्र, नौगांवा में सोमवार को 'डिप्लोमा इन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन सर्विसेज फॉर इनपुट डीलर्स' (DAESI) के सातवें बैच का विधिवत उद्घाटन किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस गरिमामय कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इनपुट डीलर्स को खेती की नई तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी से लैस होने का आह्वान किया।
इनपुट डीलर्स हैं कृषि की महत्वपूर्ण कड़ी कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि खाद-बीज विक्रेता किसानों और संस्थानों के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं। यदि विक्रेता स्वयं प्रशिक्षित होंगे, तो वे किसानों को उन्नत बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की सही जानकारी देकर फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
रसायनों का न्यायोचित उपयोग समय की मांग क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. गोपाल लाल चौधरी ने बढ़ते रासायनिक प्रयोगों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रसायनों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले नुकसान को केवल जागरूकता और सही तकनीकी ज्ञान से ही रोका जा सकता है। इसमें डीलर्स का योगदान सबसे अहम है। वहीं डॉ. राकेश कुमार जाट ने प्रतिभागियों को आगाह किया कि सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी किसानों के लिए नुकसानदेह हो सकती है, इसलिए सही और प्रमाणित सूचना ही किसानों तक पहुँचाएं।
48 सप्ताह का होगा सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए डॉ. पूनम ने बताया कि यह डिप्लोमा कोर्स कुल 48 सप्ताह का है। इसमें 40 सप्ताह सैद्धांतिक कक्षाएं और 8 सप्ताह का प्रायोगिक भ्रमण आयोजित होगा। प्रशिक्षणार्थियों को विषयवार फाइल और रिकॉर्ड तैयार करना होगा ताकि वे व्यावहारिक रूप से दक्ष बन सकें।
विभागीय योजनाओं पर जोर मुख्य अतिथि एवं कृषि विभाग के सहायक निदेशक मंगतू राम शर्मा ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए डीलर्स से इनका अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में बैच-7 के कुल 40 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. हंसराम माली ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. पूनम एवं डॉ. हंसराम माली सहित अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।