भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजनान्तर्गत राज्य स्तरीय श्री अन्न (मिलेट्स) कार्यशाला का आयोजन गुरूवार, 15 जनवरी को बीडीए ऑडिटोेरियम में किया जायेगा।
अतिरिक्त निदेशक कृषि देशराज सिंह ने बताया कि कार्यशाला में भरतपुर, डीग, अलवर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर एवं दौसा जिलों से 500 से अधिक कृषक व एफपीओ, स्वयं सहायता समूह के सदस्य भाग लेगें। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में श्रीअन्न (मिलेट्स) ज्वार, बाजरा, रागी, कुटकी, फिंगर मिलेट्स, कंगनी, चैना, कोंदो, सावा आदि फसलों की व उनसे बनने वाले उत्पादों के बारे में कृषकों को जानकारी प्रदान की जावेगी। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में केन्द्रीय व राज्य स्तरीय संस्थानों के वैज्ञानिक एवं अधिकारी मिलेट्स फसलों का राजस्थान में वर्तमान परिदृश्य, मिलेट्स पर भारत सरकार द्वारा संचालित योजनाऐं, मिलेट्स प्रसंस्करण एवं मूल्य संर्वधन तथा निर्यात संर्वधन नीति पर अपने विचार व्यक्त करेगें। कार्यशाला में श्री अन्न (मिलेट्स) से बने उत्पादों की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जावेगा, जिसमें जयपुर, जोधपुर, अलवर, भरतपुर के मिलेट्स उत्पाद निर्माता, संस्था, स्वयं सहायता समूह अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे।
संयुक्त निदेशक योगेश कुमार शर्मा ने बताया कि श्रीअन्न (मिलेट्स) मोटे अनाज व छोटे दानों वाले अनाजों का एक समूह है, जो कि गेहूँ, चावल, जौ के मुकाबले अधिक पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्द्धक होते है। उन्होंने बताया कि मोटे अनाजों में प्रोटीन, विटामिन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, जिंक की भरपूर मात्रा होती है। ये ग्लूटिन मुक्त होते है एवं इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। मोटे अनाजों में पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड और ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि मोटे अनाज मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक होते है। भारत मोटे अनाजों का सबसे बडा उत्पादक देश है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में बाजरा, ज्वार, रागी, कुटकी, फिंगर मिलेट्स, कंगनी, कोंदो, सांवा आदि फसलों की खेती आसानी से की जा सकती है।