भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) जिला परिषद के मुख्य एवं कार्यकारी अधिकारी मृदुल सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी रामजी) लागू किया गया है। यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर इसमें कई कमियां सामने आईं। कार्यों का ग्राम एवं क्षेत्रीय विकास योजनाओं से समुचित एकीकरण नहीं हो पाया, जिससे अस्थायी सड़कों, अधूरी जल संरचनाओं और बिना दीर्घकालिक लाभ वाले मिट्टी कार्यों तक ही सीमित रह गया। साथ ही, प्रभावी जांच व्यवस्था के अभाव में नकली व डुप्लीकेट जॉब कार्ड, फर्जी लाभार्थी, मनगढंत हाजिरी रजिस्टर, आंशिक या लंबित मजदूरी भुगतान जैसी समस्याएं उत्पन्न हुईं। सोशल ऑडिट की प्रक्रिया भी अपेक्षानुरूप प्रभावी नहीं रही। प्रशासनिक व्यय की सीमा मात्र 6 प्रतिशत होने से योजना का बेहतर क्रियान्वयन संभव नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि खेती के मुख्य सीजन में भी मनरेगा कार्य चलने से किसानों को मजदूरों की कमी का सामना करना पड़ता था। बेरोजगारी भत्ता और मजदूरी भुगतान में देरी पर मुआवजे के प्रावधान कागजी साबित हुए।
नई खूबियों से सुसज्जित वीबी-जी रामजी अधिनियम-2025
सीईओ ने बताया कि नए वीबी-जी रामजी अधिनियम-2025 में इन सभी कमियों को दूर किया गया है। अब सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। फसल बुवाई एवं कटाई के समय श्रमिकों की कमी न हो, इसके लिए राज्य सरकारों को 60 दिनों का कार्य विराम घोषित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे किसान और श्रमिक दोनों के हितों में संतुलन बना रहेगा। योजना के तहत जल संसाधन, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका अवसंरचना और आपदा प्रबंधन से जुड़े ठोस एवं उपयोगी कार्य कराए जा सकेंगे। जियो टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक छह माह में डिजिटल तथ्यों के साथ सोशल ऑडिट अनिवार्य होगा। इस अधिनियम में डिजिटल, बहुस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली की व्यवस्था की गई है, जिसमें समयबद्ध निस्तारण एवं जिला लोकपाल की भूमिका सुनिश्चित की गई है। मजदूरी भुगतान हर सप्ताह अनिवार्य होगा तथा दो सप्ताह से अधिक देरी होने पर श्रमिकों को स्वतः मुआवजा मिलेगा।
मुख्य एवं कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि प्रशासनिक व्यय की सीमा बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे पर्याप्त कार्मिक, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण एवं निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके साथ ही एक टिकाऊ एवं जवाबदेह वित्तीय मॉडल अपनाया गया है, जिसमें प्रत्येक वर्ष के लिए स्पष्ट एवं निर्धारित बजट तय किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे कार्य सीमित नहीं होंगे, बल्कि मांग के अनुरूप कार्य उपलब्ध कराने की व्यवस्था यथावत रहेगी। कुल आवंटन में वृद्धि से राज्यों को मनरेगा औसत की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है। यह योजना सहकारी संघवाद पर आधारित है, जिसमें राज्यों की 40 प्रतिशत भागीदारी से जवाबदेही और प्रभावशीलता बढ़ेगी। पीएम गतिशक्ति से जुड़ाव के कारण गांवों में पानी, स्थायी सड़कें और आवश्यक बुनियादी ढांचे से जुड़े वही कार्य होंगे, जिनकी वास्तव में जरूरत है।
उन्होंने बताया कि यह नया कानून ग्रामीण क्षेत्रों में सुनिश्चित और बेहतर आजीविका सुरक्षा प्रदान करेगा, उच्च गुणवत्ता वाली टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण करेगा, तकनीक आधारित पारदर्शिता से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएगा तथा राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा प्राथमिकताओं के साथ ग्रामीण रोजगार नीति को विकसित भारत के रोडमैप से जोड़ेगा। यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार की मजबूत गारंटी और विकसित भारत की सशक्त आधारशिला सिद्ध होगा, जिससे राजस्थान सहित देश के ग्रामीण क्षेत्रों को व्यापक लाभ मिलेगा।