प्रशासन को हादसे का इंतजार; नई बनने वाली सड़क के नीचे दबी लापरवाही की निशानी, कभी भी हो सकता है जानलेवा हादसा
रामगढ़ (राधेश्याम गेरा) रामगढ़ उपखण्ड क्षेत्र की ग्राम पंचायत अलावड़ा, जो कि वर्तमान में राजस्थान की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कही जाती है, आज खुद बदहाल व्यवस्था की शिकार बन रही है। कस्बा अलावड़ा को ललावंडी से जोड़ने वाली तीन मीटर चौड़ी डामर सड़क लगभग 40 वर्ष पूर्व बनाई गई थी, जो बीते 8–10 वर्षों से पूरी तरह जर्जर होकर गड्ढों के कारण जानलेवा बन चुकी थी। लंबे इंतजार के बाद विधायक सुखवंत सिंह की अनुशंसा पर सड़क का पुनर्निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसमें सड़क को लगभग एक मीटर चौड़ा किया जा रहा है।
लेकिन निर्माण कार्य के बीच ही जलदाय विभाग की पुरानी लापरवाही नई सड़क के लिए मुसीबत बनती नजर आ रही है। करीब 12 वर्ष पहले कस्बे की पेयजल आपूर्ति के लिए जलदाय विभाग ने ललावंडी रोड पर बोरिंग कर सड़क की पटरी को खोदते हुए पाइपलाइन बिछाई थी। इसके बाद नई बोरिंग कर अलग लाइन डालने के बजाय उन्हें भी उसी पुरानी पाइपलाइन से जोड़ दिया गया। नतीजा यह हुआ कि पानी के बढ़ते प्रेशर से पाइपलाइन जगह-जगह से लीक और रिसाव करने लगी।
स्थिति यह है कि सड़क के एक तरफ केवल आधा मीटर की पटरी छोड़ी गई है, जहां लगातार हो रहे पानी के रिसाव से नई डामर सड़क की नींव कमजोर हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पीडब्ल्यूडी और पीएचईडी विभाग नहीं चेते, तो नई सड़क बनने से पहले ही उसमें गड्ढे पड़ जाएंगे और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
यह मार्ग केवल गांव की सड़क नहीं, बल्कि दिल्ली से नौगांवा–अलावड़ा होते हुए बड़ौदा, लक्ष्मणगढ़, महुआ, मंडावर, बयाना और धौलपुर जाने वाला सबसे छोटा और सुगम रास्ता है। रोजाना भारी वाहनों और बसों की आवाजाही से खतरा और बढ़ जाता है।
इस पूरे मामले में पीडब्ल्यूडी की सहायक अभियंता खुशबू मीणा ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, जांच कराई जाएगी और यदि पाइपलाइन की वजह से समस्या है तो जलदाय विभाग को सुधार के निर्देश दिए जाएंगे। वहीं पीएचईडी के सहायक अभियंता सीयाराम गुर्जर से संपर्क नहीं हो पाया। कनिष्ठ अभियंता लोकेंद्र सिंह गुर्जर ने साफ कहा कि पाइपलाइन पुरानी है और जरूरत पड़ी तो उसे शिफ्ट कराया जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई करेगा, या समय रहते अलावड़ा को एक और हादसे से बचाया जाएगा?