राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी महोत्सव के पावन उपलक्ष्य में वराडा हनुमान जी धाम में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन
सिरोही (रमेश सुथार) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी महोत्सव के पावन उपलक्ष्य में वराडा हनुमान जी धाम में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन अत्यंत भव्य, दिव्य, अनुशासित एवं ऐतिहासिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में क्षेत्रभर से आए हजारों श्रद्धालु, मातृशक्ति, धर्मप्रेमी बंधु एवं संघ स्वयंसेवकों की विशाल उपस्थिति रही। संपूर्ण परिसर भगवा ध्वजों, जयघोषों और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। यह दिव्य आयोजन संत मंगल गिरी जी महाराज, राम गिरि जी महाराज जावाल, रमेश भारती जी महाराज, वराडा ,वीरनाथ जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ, जिससे कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्राप्त हुई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए संत मंगल गिरी जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं राष्ट्रप्रेरक उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय हिंदू समाज के लिए जागरण, संगठन और आत्मबल को मजबूत करने का समय है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, संस्कार और संगठन में निहित है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हिंदू समाज कमजोर होता है तो उसका प्रभाव केवल समाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे राष्ट्र की सुरक्षा, संस्कृति और पहचान पर पड़ता है। उन्होंने आह्वान किया कि हिंदू समाज जाति-वर्ग के भेद से ऊपर उठकर एकजुट, जागरूक और संगठित बने।
संत मंगल गिरी जी महाराज ने मातृशक्ति की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्कारों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य माताओं-बहनों के हाथों में है। जब मातृशक्ति जागृत होती है, तब समाज स्वतः सशक्त बनता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक योगेश कुमार जी ने अपने मार्गदर्शक उद्बोधन में कहा कि आज के समय में हिंदू संगठन कोई विकल्प नहीं, बल्कि परम आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि संघ पिछले सौ वर्षों से समाज में अनुशासन, सेवा, राष्ट्रभक्ति और संस्कार का कार्य निरंतर करता आ रहा है।
उन्होंने समाज में आवश्यक पाँच प्रमुख परिवर्तनों पर विशेष बल देते हुए कहा कि— स्वदेशी जागरण, नागरिक कर्तव्यबोध, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता तथा पर्यावरण एवं जीवन मूल्यों का संरक्षण—इन बिंदुओं को जीवन में उतारकर ही सशक्त हिंदू समाज और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव है।
सम्मेलन की एक विशेष विशेषता हजारों की संख्या में मातृशक्ति की गरिमामय, अनुशासित एवं सक्रिय सहभागिता रही, जिसने कार्यक्रम को नई ऊर्जा प्रदान की और यह संदेश दिया कि हिंदू समाज का जागरण सर्वांगीण और व्यापक है।
कार्यक्रम में संघ स्वयंसेवकों द्वारा की गई अनुशासनपूर्ण व्यवस्थाएँ, संत-महात्माओं के प्रेरक आशीर्वचन, भक्ति-भाव और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत वातावरण ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। यह सम्मेलन संघ शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत हिंदू समाज को संगठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण, प्रेरणास्पद एवं स्मरणीय आयोजन सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों द्वारा सभी संत-महात्माओं, मातृशक्ति, श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं स्वयंसेवकों का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।