बसंत पशु मेला एवं प्रदर्शनी में क्षेत्रीय कवि सम्मेलन आयोजित

Jan 21, 2026 - 11:49
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बसंत पशु मेला एवं प्रदर्शनी में क्षेत्रीय कवि सम्मेलन आयोजित

वैर(भरतपुर/कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) कस्बे में नगरपालिका की ओर से आयोजित बसंत पशु मेला एवं प्रदर्शनी में वीरांगना रूप कंवर जन सांस्कृतिक मंच द्वारा क्षेत्रीय कवि सम्मेलन वेद प्रकाश शर्मा वेद वरिष्ठ कवि, लेखक व साहित्यकार के मुख्य आतिथ्य व संरक्षक हरिशंकर शर्मा वरिष्ठ शिक्षक नेता की अध्यक्षता व योगेंद्र प्रभाकर पूर्व प्रधानाचार्य, देवेंद्र गौड़ पूर्व अध्यक्ष ब्राह्मण समाज के  सानिध्य में आयोजित किया गया।
अतिथियों ने मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन किया। मेला कमेटी की ओर से अतिथियों का सम्मान माला, पटका, शाल, साफा बांधकर व प्रतिक चिन्ह देकर किया गया।  मां शारदे की वंदना मीनाक्षी सारस्वत द्वारा मां शारदे जब मैं तुमको पुकारू आ जाना प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन में कवियों द्वारा वीर, हास्य, ओज व श्रृंगार की रचनाओं में कश्मीर, संसद, चुनाव व भ्रष्टाचार में लिप्त राजनेताओं पर कविता सुनाई। श्रोताओं द्वारा तालियां बजाकर स्वागत किया।

कवि सम्मेलन का प्रारंभ डॉ इस्लाम खानवी ने शब्दों के माध्यम से कहा हम देंगे जान, मगर अपना यह जम्हीर नहीं देंगे, हम जीते जी तो अपना यह कश्मीर नहीं देंगे। श्रोताओं द्वारा जोरदार तालियां बजाकर कविता का स्वागत किया। बाल कवि प्रणय शर्मा यश ने कहा आजकल की लड़कियां भी गजब ढा रही, कॉलेज के बहाने एक्टिवा चला रही पर श्रोताओं द्वारा नन्हे बाल कवि के  स्वागत में तालिया की बौछार कर दी। 
कवि कौशल गौड ने कहा मुझे माफ करना विद्वानों मैं बालक नादान हूं, सत्य बोलने की हिम्मत है सिंहों की संतान हूं। कवि विकास सिकरवार ने कहा दिल में हिंदुस्तान लिए मैं परिवेश बचाने आया हूं, यह भारत माता की नव उन्मेशों जागो मैं तुम्हें  जगाने आया हूं। कवि अंकित गोला ने लिमिट तथा द्वारकाधीश विरही ने भक्ति रस में कहा रोबति जसुमति मई, कन्हैया तोरी याद आयी। कवियित्री मीनाक्षी सारस्वत ने कहा भूलों सभी को मगर मां-बाप को भूलें नहीं, उपकार अनगिनत है कभी इस बात को भूलें नहीं।

कवि हेमेंद्र परमार मनु ने वीर रस में कहा कितने वीर बलि होते हैं, कितने बेटे सीमा पर बलिदानी हो जाते हैं। कवि संजय हिंदुस्तानी ने कहा जामवंत बन हनुमान को बोध कराने आया हूं, गुमनामी में जो सोए हैं उन्हें जगाने आया हूं। कवि गोविंद सिंह परमार ने कहा मेरी कलम पूछती है, इन संसद के किरदारों से, गंध सुरा की क्यों आती है संसद की दीवारों से। कवि दिनेश अनुभवी ने कहा पहली मिलन की पहली होली वृंदावन में खेली। कवि मनोज खंडूजा ने कहा चुनावों की फिर धूम मची है, सत्ता के गलियारों में, फिर दर्शन देंगे नेताजी, गांव की गलियारों में।

कवि ज्ञानी राम अज्ञानी ने संसद में खोटे सिक्कों को हमने बहुत उछलते देखा है। आनन्द प्रकाश आनन्द ने कहा पाकिस्तानी झंडे से ऊपर हिंदुस्तान झंडा की कहानी है। वरिष्ठ कवि गीतम सिंह परमार ने कहा असुअनि भरें है ये नैन, बिटिया के नैन, लाडली के नैन, लली ससुराल चली। युवा कवि योगेश कौशिक ने कहा कानून बनाने वाले, कमीशन खाने में लगे हैं कविता सुनाई। 
अंत में मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ कवि वेद प्रकाश वेद ने कहा हिंदी में ही हर मानव का मीठा अरमान रहे, हिंदी में हर लक्ष्य सिद्धि का स्वप्न रहे, जय गान रहे। जिस पर श्रोताओं द्वारा तालियां बजाकर कवि का स्वागत किया। संचालन युवा कवि योगेश कौशिक ने किया। इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी योगेश पिप्पल, वरिष्ठ लेखाकार सौरभ सिंघल, सोनू बंसीवाल, कनिष्ठ अभियंता अरविंद सिंह
एडवोकेट धीरज शुक्ला, राजू पाराशर, डूंगर सहाय दत्तात्रेय, अवनीश शर्मा, देवी चरण शर्मा, अशोक कटारा, जयप्रकाश, प्रमोद शर्मा, सतीश सारस्वत, सौरभ सिंघल, गोपेश शर्मा, सुरेश गुर्जर, राहुल कोली, हितेश, घनश्याम कुशवाह सहित नगर पालिका कर्मचारी, पुलिस प्रशासन, एवं काव्य प्रेमी श्रोता मौजूद रहे।

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