शिव पार्वती विवाह की कथा सुनाई, महिलाओं ने गाए बधाई गीत
सकट. (अलवर) कस्बे की नदी किनारे स्थित रामेश्वर धाम वीर हनुमान मंदिर पर जय हनुमान जय उपयोग सेवा संस्थान ट्रस्ट सकट के तत्वाधान में मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित महारुद्राभिषेक व मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर चल रही सात दिवसीय श्रीमद् शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन शिव पार्वती विवाह की कथा प्रसंग हुआ। ऋषिकेश के कथा व्यास शिव चैतन्य ने बताया कि आत्मा का परमात्मा से मिलन ही शिव में लीन हो जाना है। भगवान शंकर वैराग्य के देवता माने गये है। बाबजूद शिव ने विवाह कर गृहस्थ आश्रम में रहकर वैराग्य धर्म का अनुसरण करने का तरीका दिया।
कथावाचक ने कहा कि शिव परिवार में भगवान का वाहन नंदी, मां पार्वती का शेर, गणेश भगवान का मूषक और कार्तिकेय का वाहन मोर है। सभी विपरीत विचारधारा के बीच सामंजस रखना शिव पुराण सिखाता है। उन्होनें ने शिव पार्वती के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि मैंना देवी व हिमालय राज की पुत्री के रूप में मां पार्वती जन्म लेकर भगवान शिव की घोर तपस्या की। उसी दौरान ताडकासुर के आतंक को खत्म करने के लिये शिव का तंद्रा भंग हुई। तब जाकर शिव का विवाह हुआ। कथा के दौरान शिव पार्वती की संजीव झांकी सजाई गई जो आकर्षक का केंद्र रही। शिव पार्वती विवाह पर महिलाओं ने बधाई गीत गाए और कन्या दान किया। कथा सुनने के लिए प्रति दिन कस्बा सहित आसपास के गांवों के अलावा राजगढ़ बांदीकुई अलवर दौसा जयपुर दिल्ली हरियाणा तक के श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर महंत रमाकांत जैमन ने बताया कि 1 फरवरी को हनुमान जन्मोत्सव कथा विश्राम मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व पूर्णाहुति के साथ भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

