दो दिवसीय उद्यानिकी एवं प्रसंस्करण तकनीकी सेमिनार का शुभारम्भ; उद्यानिकी योजनाओं को किसान सकारात्मक सोच के साथ अपनायें-संभागीय आयुक्त
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) उद्यानिकी एवं प्रसंस्करण तकनीकी की दो दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया ने शुक्रवार को कृषि विभाग के सभागार में किया।
संभागीय आयुक्त ने कहा कि उद्यान विभाग द्वारा चलाई जा रही उच्च उद्यानिकी की तकनीकों जैसे ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस लो टनल, मल्चिंग, सोलर पंप, बूंद बूंद सिंचाई, फव्वारा सिंचाई को अपनाकर किसान अपनी आर्थिक तरक्की का रास्ता खुद तैयार करें। उन्होंने किसानों को फल बगीचाओं की स्थापना के साथ-साथ फल सब्जी प्रसंस्करण अपना कर अधिक लाभ कमाने और केवल किसान बनकर ही नहीं रहने बल्कि व्यापारी बनकर खेती करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन से अधिक लाभ विपणन और प्रसंस्करण में है। सभी किसान उद्यान की योजनाओं को सकारात्मक सोच के साथ अपनाकर आर्थिक उन्नति के साथ अपनी पहचान बनाऐं।
अतिरिक्त निदेशक कृषि तिलहन देशराजसिंह ने संभागीय कृषि परिदृश्य की जानकारी देते हुए बताया कि कृषि फसलों से ज्यादा लाभ सब्जी उत्पादन, सब्जी उत्पादन से अधिक लाभ फलोद्यानों से तथा फलोद्यानों से अधिक लाभ संरक्षित खेती योजना अंतर्गत ग्रीन हाउस तथा नेट हाउस में मिलता है। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि किसान अपनी फल सब्जी की उपज का मूल्य संवर्धन कर विभिन्न उत्पाद जैसे जैम, जेली, अचार, मुरब्बा, शरबत, सॉस, कैचप इत्यादि बनाकर उपभोक्ताओं को सीधे बेचने पर ध्यान दें तो सर्वाधिक लाभ होगा।
संयुक्त निदेशक उद्यान भरतपुर संभाग योगेश कुमार शर्मा ने किसानों से अपील की गई की परंपरागत फसलों के साथ-साथ फसल विविधीकरण के तहत आधुनिक तकनीक द्वारा उद्यान की फसलों जैसे फल,सब्जी, फूलों की खेती, मसाले की खेती अपनाये तो अधिक मुनाफा होगा। उन्होंने बताया कि परंपरागत फसलों जैसे गेहूं, जो, चना, सरसों, ज्वार, बाजरा, मक्का इत्यादि की खेती से जीवन यापन किया जा सकता है, अगर आर्थिक विकास करना है तो उच्च उद्यानिकी की तकनीक जैसे ग्रीनहाउस ,सोलर पंप सेट, लो-टनल, मल्च, मिनी फवारा, फवारा, बूंद बूंद सिंचाई पद्धति जैसी योजनाओं को अपनाना ही पड़ेगा।
उपनिदेशक उद्यान जनकराज मीना ने बताया कि सेमीनार में जयपुर, आगरा, दिल्ली से उच्च उद्यानिकी की तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाया गया है जो कट फ्लावर, सूक्ष्म सिंचाई, फर्टिगेशन, ग्रीन हाउस, नेट हाउस, फल -सब्जी प्रसंस्करण, औद्योगिक स्थापना हेतु वित्तीय ऋण की उपलब्धता, विभागीय योजना की जानकारी इत्यादि पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम की शुरुआत में उपनिदेशक उद्यान द्वारा दो दिवसीय उच्च उद्यानिकी तकनीकी सेमिनार में उपस्थित सभी अतिथियों एवं किसानों का स्वागत और सम्मान करते हुए बताया कि इस दो दिवसीय सेमिनार में अलवर, भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर तथा दौसा जिले के लगभग 100 किसानों द्वारा भाग लिया गया है।

