बसंत पंचमी सन् 1733 में लोहागढ़ मैदानी दुर्गा की नींम महाराजा सूरजमल द्वारा रखी गई -सुधा सिंह
भरतपुर( विष्णु मित्तल) बसंत पंचमी सन् 1733 में लोहागढ़ मैदानी दुर्गा की नींम महाराजा सूरजमल ने फुलवारी में हवन कर नागा व ब्राह्मणों द्वारा भरतपुर किले की नींम रखी गई उस समय महादेव फुलेश्वर जी फुलवाड़ी मंदिर का निर्माण कराया गया भरतपुर किले के निर्माण के लिए 3 किलोमीटर खाई खोद कर मिट्टी का भार्त कर फोर्ड के लिए ऊंचा स्थान बनाया गया तथा दो द्वारा व आठ बुर्जों के साथ एक अभेद्य दुर्गा लोहागढ़ का निर्माण किया गया भरतपुर लोहागढ़ दुर्ग के बनने से पहले बिहारी जी का नागा साधुओं द्वारा बनाया गया प्राचीन मंदिर यहां विद्यमान था जो रूप रेल नदी के किनारे पर बना हुआ था महाराजा सूरजमल ने 1734 में बिहारी जी मंदिर को भाव्य व कलात्मक बनाने का कार्य किया
भरतपुर लोहागढ़ किले में 18 मंदिर हैं जो अपना एक ऐतिहासिक महत्व रखते हैं जिनका निर्माण महाराजा सूरजमल व महारानी किशोरी से लेकर आजादी तक उनके वंशजों ने कराया लोहागढ़ किले में मुख्यतः प्राचीन बिहारी जी मंदिर ,श्री किशोरी मोहन जी का मंदिर जिसका निर्माण महारानी किशोरी ने कराया था तथा उसके खर्च हेतु 136 बीघा कृषि भूमि भी मंदिर को दान में दी गई थी महाराजा सूरजमल ने बिहारी जी मंदिर के लिए भी 2523 बीघा कृषि भूमि मंदिर के सफल संचालन खर्च हेतु मंदिर को दी थी एवं मदन मोहन जी टंडेवारे के लिए 1499 बीघा जमीन कृषि हेतु खर्च के लिए दी गई थी यह तीनों मंदिर नागा साधुओं के द्वारा संचालित होते थे तथा यह निंबार्क संप्रदाय के थे
1775 से 1785 के कालखंड में लोहागढ़ दुर्ग में श्री लाला महाराज वैशाव संप्रदाय के भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया साथ ही दरियाव मोहन जी मंदिर,श्री राधेश्याम जी मंदिर, रघुनाथ जी लोह लांगडी मंदिर,चामुंडा जी मंदिर, गोपाल जी मंदिर, चतुर्भुज जी मंदिर, हनुमान जी तवेला वाले मंदिर, श्री हनुमान जी नाक्काखाना बागड़ वाले मंदिर, श्री रघुनाथ जी लोह लागरी वाले मंदिर, मंदिर हनुमान जी लाइन गुढ चढ़ा, चबूतरा नाहर सिंह नरगडा मंदिर ,राधा रमन जी मंदिर, हनुमान जी महाराज व महादेव मंदिर प्राचीन मंदिर ,रामलला मंदिर आदि प्रमुख मंदिरों का निर्माण आगामी 1774 से 1934 तक हुआ
जो की एक ऐतिहासिक मंदिर भरतपुर किले में है लोहागढ़ किले के अंदर वैशाव संप्रदाय , रामानुज संप्रदाय निबार्क संप्रदाय वह शैव संप्रदाय के मंदिरों का निर्माण प्रमुखता से हुआ लोहागढ़ किले के अंदर 18 प्राचीन मंदिरों की भरतपुर के शासक महाराजा सूरजमल व उनकी आगामी पीडियौं ने 4198 बीघा कृषि भूमि मंदिरों के साथ दी जिससे उनके सफल संचालन में कोई व्यवधान ना आए भरतपुर के मंदिरों के पास हजारों बीघा जमीन आज भी है भरतपुर जिले में सैकड़ो बिहारी जी के मंदिर श्री कृष्ण के बने हैं क्योंकि श्री कृष्णा भरतपुर स्टेट के आराध्य थे भरतपुर में आठ गंगा मंदिर, सात लक्ष्मण मंदिर श्री हनुमान जी के 80 मंदिर सरकारी रिकॉर्ड में है किले के 18 सरकारी व 10 अन्य मंदिरों सहित यह दुर्ग दुर्गा अभैध्य लोहागढ़ भक्ति का भी प्रमुख केंद्र है इन मंदिरों में आज भी 14000 से ऊपर भक्तगण दर्शन करने के लिए प्रतिदिन आते हैं |

