जनवरी माह में ध्वस्त किए गए बावड़ी से भगत सिंह सर्किल तक मकान एवं दुकानों को लेकर कुछ परिवार पलायन करने को मजबूर, उपखंड अधिकारी को सोपा ज्ञापन
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) पिछले दिनों जनवरी माह में नगर पालिका प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए गए मकान एवं दुकानों को लेकर डॉक्टर श्याम सुंदर मीणा के नेतृत्व में उपखंड अधिकारी अर्चना चौधरी को ज्ञापन सोपा ।
ज्ञापन में बताया कि प्रशासन की इस कार्रवाई से अनेक गरीब लोग प्रभावित हुए हैं ।जिनके पास रहने को बिल्कुल घर एवं दुकान नहीं बचे अन्य मुआवजा योग पीड़ित जन इन गरीबों के पास कोई अन्य जमीन या संपत्ति नहीं है । पीड़ित पक्ष लक्ष्मणगढ़ से पलायन करने को मजबूर है।
- 1 =डालचंद कोली पिता भगवान सहाय कोली का पूरा मकान टूट गया है। 5 बच्चे व दो मां-बाप पूरी तरह सड़क पर सोते हैं।
- 2= रामबाबू शर्मा पिता रामजीलाल शर्मा के परिवार में आठ सदस्य हैं ।लगभग संपूर्ण मकान तोड़ दिया गया है। इनको रहने को जगह नहीं है।
- 3=राजेंद्र कोली पिता भिल्लू मिस्त्री 6 सदस्य हैं ।उनके पास मात्र एक कमरा ही बचा हुआ है।
- 4=कन्हैयालाल राकेश गणेश लालाराम कोली पिता आनंदीलाल कोली उनके परिवार में 19 सदस्य हैं। एक कमरा ही बचा हुआ है। सड़क पर ही बीमार पड़े हुए हैं।
- 5=कैलाश कोली पिता छोटेलाल परिवार में आठ सदस्य हैं दीवार ही बची है सड़क पर ही सोते हैं।
- 6=मनमोहन कोली पिता हरसाय कोली पूरा मकान टूट चुका है। पांच सदस्य हैं।
- 7=मानसिंह कोली पिता खवानी राम कोली का पूरा मकान टूट गया है। पांच सदस्य घर में मौजूद है।
- 8=रघुवीर कोली पिता खवानी राम कोली परिवार में 10 सदस्य हैं सिर्फ 5- 6 फीट मकान बचा है। सड़क पर आ गए हैं।
- 9=सुरेश कोली पिता अमरचंद कोली के परिवार में छह सदस्य हैं मात्र एक कमरे की जगह ही बची हुई है।
- 10=अन्य मुआवजे योग पीड़ित जन को राहत दिलाए जाने की मांग करते हुए सूची उन लोगों की जिनके वर्षों से यहां आवास थे। वह दैनिक मजदूरी करके अपना पालन पोषण कर रहे हैं ।कोई कार्य इनके पास नहीं है। ये घर नये बस स्टैंड मालाखेड़ा रोड से राम लक्ष्मण चक्की तक स्थित है। इनके पास कोई जगह धन जमा पूंजी नहीं है कुछ बच्चे व महिलाएं खुले में रहने से बीमार है । अविलंब इनको नगर पालिका प्रशासन से रहने को प्लॉट व अन्य मुआवजा दिया जाए मामले की जांच कर अन्य योग जनों की भी आवाज सुनी जाए। यह कार्य ग्रीष्मकल से ही पूर्व कर दे जिससे जनहानि एवं अन्य बीमारियों से बच सके। व लोकतंत्र के प्रति पीड़ितों का विश्वास बढ़ सके। इनको लक्ष्मणगढ़ से पलायन नही करना पड़े।