मेघवाल समाज ने मृत्युभोज और फिजूलखर्ची पर लगाई पाबंदी
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। समाज में व्याप्त पुरानी कुरीतियों को जड़ से मिटाने और शिक्षा व सादगी को बढ़ावा देने के लिए गाँव चुई (डेगाना) के मेघवाल समाज ने एक ऐतिहासिक बैठक कर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। रविवार, 1 मार्च 2026 को आयोजित इस बैठक में समाज के प्रबुद्धजनों ने सर्वसम्मति से सामाजिक उत्थान के लिए कड़े संकल्प पारित किए। समाज ने निर्णय लिया है कि अब से गाँव में कोई भी मृत्युभोज नहीं करेगा। शोक के अवसर पर केवल साधारण भोजन सब्जी-पूरी या दाल-पूरी ही बनाया जाएगा। किसी भी प्रकार की मिठाई बनाने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। पैरानी यानि पेरावनी और ओढ़ावनी जैसी रस्मों के लेनदेन को बंद कर दिया गया है। उपहार के तौर पर सगुन की राशि भी 1100 या 2100 रुपये से अधिक नहीं दी जाएगी। यह कदम मध्यम और गरीब परिवारों को आर्थिक बोझ से बचाने के लिए लिया गया है। अनावश्यक यात्रा और खर्च को कम करने के लिए हरिद्वार जाने की प्रथा को समाप्त कर, अब केवल पुष्कर में अस्थि विसर्जन करने का निर्णय लिया गया है। शादियों और अन्य आयोजनों में डीजे बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। समाज ने स्पष्ट किया है कि कानूनन भी यह वर्जित है और उल्लंघन करने वालों का समाज साथ नहीं देगा। बैठक का मुख्य उद्देश्य सामाजिक उत्थान रहा। समाज के लोगों ने शपथ ली कि वे अपना ध्यान और संसाधन बच्चों की शिक्षा और सदाचार पर केंद्रित करेंगे ताकि एक उन्नत समाज का निर्माण हो सके। बैठक के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने इन नियमों का कड़ाई से पालन करने की शपथ ली और हस्ताक्षर कर अपनी सहमति जताई। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य और समाज को आर्थिक गुलामी से मुक्त कराने के लिए अनिवार्य थे।