करोड़ों का बजट फिर भी गंदगी का अंबार: गोविंदगढ़ में ठेकेदार की मनमानी से दुकानदार खुद कर रहे नालों की सफाई
गोविन्दगढ़, (अलवर) अमित खेड़ापति
गोविंदगढ़ कस्बे के जालुकी रोड और रामगढ़ रोड के निवासी इन दिनों नगरपालिका और सफाई ठेकेदार की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा भुगत रहे हैं। सफाई के नाम पर सालाना लगभग 1करोड़ 92 लाख रुपये के भारी-भरकम बजट के बावजूद, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। प्रतिदिन करीब 52,602 रुपये खर्च होने के बाद भी कस्बे के मुख्य रास्तों पर गंदगी और सड़ांध का बोलबाला है।
खुद उठाना पड़ रहा है कचरा, मच्छरों का आतंक
स्थानीय निवासी दीपक और पंकज ने बताया कि पिछले कई महीनों से नालियों की सफाई नहीं हुई है। सफाईकर्मियों से गुहार लगाने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूरन दुकानदारों को खुद ही अपने हाथों से नालों की सफाई करनी पड़ रही है। क्षेत्र में मच्छरों का इतना प्रकोप है कि लोग आए दिन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। दुकानदारों का आरोप है कि सफाईकर्मी केवल रविवार को छुट्टी मनाने और मुख्य सड़क पर झाड़ू लगाकर कचरा वापस नालियों में धकेलने का काम कर रहे हैं।
10 साल से निकास का इंतजार, अतिक्रमण ने रोका रास्ता
रामगढ़ रोड से सीकरी बाईपास तक जाने वाला मुख्य नाला कस्बे की सबसे बड़ी मुसीबत बन चुका है। निर्माण के 10 साल बाद भी इसके पानी की निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है। हालत यह है कि पिनच मंदिर के पास कुछ रसूखदारों ने नालों को बंद कर दिया है। और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर दुकानों के नाम पर नालों को मिट्टी से भर दिया गया है।
नगरपालिका के अतिक्रमण हटाओ अभियान में भी इन स्थानों को छोड़ दिया गया । जिससे अन्य दुकानदारों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष है।
लाखों के खर्च पर सवालिया निशान
यशवंत ,संदीप,मनोज ने बताया कि हैरानी की बात यह है कि जब सफाई व्यवस्था पर रोजाना 50 हजार रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। तो नालियां ब्लॉक क्यों हैं? उन्होंने मांग है कि जल्द ही अतिक्रमण हटाकर नालों की सफाई
करते हुए नाले को आगे के नाले से जोड़ा जाए। जिससे यहां के दुकानदार और कॉलोनीवासियों को इस समस्या से स्थाई समाधान मिल सके।
इस मामले की जानकारी के लिए जब नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी जगदीश खीचड़ से संपर्क का प्रयास किया गया पर नहीं हो पाया वहीं सफाई ठेकेदार प्रदीप जैन ने जल्द ही सफाई व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया।