गुरु पूर्णिमा पर्व पर मुक्ता देवी बनी सनातनी दीक्षा लेकर साध्वी मुक्ताबाई
लक्ष्मणगढ़ (अलवर ) तहसील क्षेत्र के ग्राम जागरु में, मंगलदास कुटी आश्रम पर बड़ी धूमधाम से गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया।
जिसमें जिले सहित प्रदेश के अन्य राज्यों से भी गुरु आश्रम पर श्रद्धालु अपनी भक्ति भावना से सम्मिलित हुए। पर्व पर गुरु पूजन हवन यज्ञ रात्रि को जागरण भजन जिगड़ी दंगल का भी आयोजन किया गया। वहीं आश्रम पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। मंगलदास कुटी पर क्षेत्र के लोगों की विशेष आस्था है।
गुरु पूर्णिमा पर्व पर गांव की मुक्ता देवी (बहू )को दीक्षा महाराज महेंद्र सेवादास द्वारा दी गई। मुक्ता देवी ने ग्रस्थ जीवन को त्याग कर सन्यास की ओर चलते हुए दीक्षा ली ।मुक्ता देवी अब बनी है । सन्यास मुक्ताबाई। मुक्ताबाई ने महन्त सेवादास की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया है । मुक्ताबाई का कहना है की ग्रस्थ जीवन के पश्चात अब मैं संन्यास आश्रम में जा चुकी हूं ।और ईश्वर की भक्ति पूजा करना मेरा धेय है। व्यक्ति के चार आश्रम होते हैं बाल आश्रम जिसे ब्रह्मचर्य आश्रम भी कहते हैं । ग्रस्थ आश्रम,वानप्रस्थ आश्रम व सन्यास आश्रम वृद्ध आश्रम उन सभी को निभाना है। भक्ति मार्ग पर चलना जरूरी है।
मैंने बाल आश्रम पिता के यहां बिताया ग्रस्थ आश्रम पति के साथ बिताया अब मुझे वानप्रस्थ और सन्यास आश्रम व्यतीत करना है। मुझे अब उस परमपिता परमात्मा ईश्वर की भक्ति करनी है। तभी मुझे मुक्ति मिल पाएगी। मैं आज मेरे गुरुदेव श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महेंद्र सेवादास से दीक्षा लेते हुए मुझे सन्यास मार्ग पर चलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है अब मुझे सांसारिक सुखों से कोई लेना-देना नहीं सनातन धर्म के अनुसार चार वेद होते हैं। चार पुराण इसी प्रकार मानव जीवन को भी आश्रमों में बाटा गया है। और मुक्ति के लिए भक्ति का मार्ग जरूरी है। पेट का भजन अन्न तो आत्मा का भोजन भजन है । गुरु के बिना मुक्ति नहीं तो आज मुझे मेरे गुरु ने गुरु दीक्षा देकर मुझे भक्ति मार्ग पर चलने का पाठ सिखाया ।मैं आज सौभाग्यशाली हुई धन्य हुई ।


