लोक अदालत की समझाइश से टूटने से बचा परिवार, साथ रहने को राजी हुए पति-पत्नी
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। तालुका विधिक सेवा समिति, मकराना के तत्वावधान में सोमवार को मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान एक सुखद तस्वीर सामने आई, जब लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी आपसी समझाइश के बाद पुनः एक साथ रहने को तैयार हो गए। प्रकरण गुलाम साबिर बनाम साजिदा (मुकदमा संख्या 12/25) में पिछले काफी समय से दाम्पत्य अधिकारों की पुर्नस्थापना को लेकर न्यायालय में विवाद चल रहा था।
सेवानिवृत्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश व लोक अदालत के अध्यक्ष श्री अयूब खान ने दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी काउंसलिंग की और भविष्य के साथ-साथ उनके बच्चे के हित का हवाला दिया। अध्यक्ष की समझाइश रंग लाई और दोनों पति-पत्नी पुरानी कड़वाहट भुलाकर पूर्व की भांति साथ रहने को राजी हो गए। इसके साथ ही उन्होंने न्यायालय में विचाराधीन अन्य समस्त प्रकरणों को भी वापस लेने पर सहमति जताई। मामले में वादी के अधिवक्ता शेख अकबर अली व आशीष शर्मा तथा प्रतिवादिनी के अधिवक्ता आबिद गौड़ व शब्बीर अहमद ने पैरवी की।
मासिक लोक अदालत में अन्य प्रकरणों का निस्तारण
लोक अदालत के दौरान केवल पारिवारिक ही नहीं, बल्कि दो अन्य मुकदमों का भी आपसी राजीनामे के जरिए निस्तारण किया गया। उल्लेखनीय है कि तालुका स्तर पर प्रत्येक माह के अंतिम सोमवार को मासिक लोक अदालत का आयोजन किया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य पक्षकारों के बीच समझाइश कर तुरंत राहत प्रदान करना है। लोक अदालत की बेंच में सदस्य के रूप में पेनल अधिवक्ता गिरधारी जोशी उपस्थित रहे। इस अवसर पर विश्राम मीणा विधिक लिपिक, शेख अकबर अली अध्यक्ष बार एसोसिएशन मकराना, पेनल अधिवक्ता तलत हुसैन हनीफी, आशीष शर्मा, शब्बीर अहमद आदि उपस्थित थे।
अध्यक्ष का संदेश: "लोक अदालत विवादों को जड़ से खत्म करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसमें न किसी की जीत होती है और न हार, बल्कि आपसी भाईचारा बढ़ता है।"


