आधा रोड़ बनाने के बाद अधूरी छोड़ी सड़क बनी आफत, कॉलोनीवासियों ने दी आंदोलन की चेतावनी

Apr 16, 2026 - 19:29
Apr 16, 2026 - 19:30
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आधा रोड़ बनाने के बाद अधूरी छोड़ी सड़क बनी आफत,  कॉलोनीवासियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
आधा रोड़ बनाने के बाद अधूरी छोड़ी सड़क बनी आफत,  कॉलोनीवासियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
भीलवाड़ा :(राजकुमार गोयल) कोटा रोड़ ईरास से देवछाया विहार कॉलोनी सहित एक दर्जन से भी ज्यादा कॉलोनियों को जोड़ने वाला मुख्य सड़क मार्ग इन दिनों कॉलोनिवासियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। नगर विकास न्यास द्वारा ईरास स्टीवर्ड स्कूल से देवछाया विहार कॉलोनी सहित नगर विकास न्यास की एपीजी अब्दुल कलाम व प्रियदर्शनी नगर को जोड़ने वाले 80 फीट मुख्य मार्ग को अधूरा छोड़ने पर कॉलोनिवासियों सहित किसान वर्ग में भी भारी आक्रोश है। करोड़ो रूपयों की स्वीकृति के बावजूद नगर विकास न्यास द्वारा आधा रोड़ बनाकर अधूरा छोड़ दिया गया, जो मास्टर योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़ा करने के साथ ही कॉलोनिवासियों की रोजमर्रा की मुश्किले पैदा कर रहा है।
अधूरे रोड़ कार्य को लेकर राजस्थान प्रदेश माली (सैनी) महासभा के प्रदेश महामंत्री गोपाललाल माली ने नगर विकास न्यास में कई बार आपत्ति भी दर्ज करवाई। लेकिन वर्तमान हालात बेहद खराब है, जबकि यह सड़क क्षेत्र नगर विकास न्यास द्वारा अपू्रड कॉलोनिवासियों सहित किसान वर्ग की जीवन रेखा है।
माली ने यह भी बताया कि हाल ही सड़क की हालत बेहद खराब है, जगह-जगह बड़े-बड़े खड्डे होने और उड़ती धूल से स्वास्थ्य पर भी खतरा आये दिन बना रहता है, और आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती है। कभी-कभी तो आवागमन में सबसे अधिक परेशानियां स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजो को झेलनी पड़ती है। 
हालांकि इस अधूरे रोड़ को पूरा करने की टेण्डर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद काम ठप पड़ा है। इससे अफसरों की लापरवाही और विभागीय निगरानी की कमी साफ नजर आ रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता को उजाकर करती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यूआईटी द्वारा स्वीकृति के बावजूद सड़क अधूरी क्यों? संबंधित विभाग और अधिकारी अब तक चुप क्यो है? क्या आम जनता की परेशानियां प्रशासन के लिए मायने नहीं रखती? कॉलोनिवासियों और किसानों ने चेतावनी देते हुए साफ कहा कि यदि रोड़ का कार्य जल्द ही शुरू नहीं किया गया, और सड़क को पूरा नहीं बनाया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। यह मामला केवल एक सड़क का ही नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही का है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन व संबंधित विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब संज्ञान लेते है, और दोषी अफसरों व ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्यवाही करते है।

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