भीषण गर्मी में पक्षियों की प्यास बुझाने आगे आई महिला वैश्य महासम्मेलन समिति, खेड़ली में लगाए परिंडे
खेड़ली (दिनेश लेखी) उपखण्ड क्षेत्र में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और तपते मौसम के बीच बेजुबान पक्षियों के लिए राहत पहुंचाने का सराहनीय प्रयास महिला वैश्य महासम्मेलन समिति खेड़ली द्वारा किया गया। बुधवार को समिति की ओर से कस्बे के विभिन्न स्थानों, पेड़ों और सार्वजनिक जगहों पर परिंडे लगाकर पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की गई। यह अभियान समिति की अध्यक्ष मोनिका मोदी के नेतृत्व में संचालित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में महिला सदस्याओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
समिति की महामंत्री सुषमा खंडेलवाल ने बताया कि गर्मी के मौसम में तापमान लगातार बढ़ने से जल स्रोत सूखने लगते हैं, जिससे पक्षियों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है। ऐसे में मानव समाज का यह कर्तव्य बनता है कि वह बेजुबान जीवों की सहायता के लिए आगे आए। इसी सोच के साथ समिति द्वारा यह पहल की गई है, ताकि पक्षियों को राहत मिल सके और वे इस भीषण गर्मी में जीवित रह सकें।
उन्होंने बताया कि समिति की सदस्याओं ने न केवल परिंडे लगाए, बल्कि उन्हें नियमित रूप से साफ रखने और उनमें पानी भरने की जिम्मेदारी भी ली है। साथ ही आमजन को भी जागरूक करते हुए अपील की गई कि वे अपने घरों की छतों, आंगन, पेड़ों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी के बर्तन रखें, जिससे अधिक से अधिक पक्षियों को लाभ मिल सके।
इस सामाजिक अभियान में समिति की कोषाध्यक्ष सीमा सर्राफ, प्रचार-प्रसार मंत्री मधु गोयल, उपाध्यक्ष कल्पना खंडेलवाल, संगठन मंत्री सीमा बूस्टर, अनीता गोयल, सीमा गोयल, निर्मल खंडेलवाल, निधि मोदी, साक्षी और रीता ने सक्रिय भूमिका निभाई। सभी सदस्याओं ने एकजुट होकर इस अभियान को सफल बनाया और समाज में पर्यावरण संरक्षण व जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के छोटे-छोटे प्रयास ही समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर एक परिंडा भी लगाकर उसमें नियमित पानी भरे, तो हजारों पक्षियों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और सामाजिक सेवा से जुड़े अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
स्थानीय लोगों ने भी समिति की इस पहल की सराहना की और इसे मानवता व संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। इस तरह के प्रयास न केवल पक्षियों को राहत पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी का भी संचार करते हैं।


