मानखेड़ा में फिर शुरू हुआ 10 करोड़ के एफएसटीपी प्लांट का काम, खेत मालिकों ने जताया विरोध
कठूमर (दिनेश लेखी) नगरपालिका क्षेत्र के मानखेड़ा गांव में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) निर्माण कार्य एक बार फिर मंगलवार को शुरू हो गया। नगरपालिका प्रशासन ने पोखर के पास चिन्हित स्थान पर दो जेसीबी मशीनों की मदद से भूमि समतलीकरण और निर्माण पूर्व तैयारियां शुरू कराईं।
कार्य शुरू होते ही आसपास के खेत मालिकों और ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराते हुए तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य रुकवाने की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित डंपिंग यार्ड प्राकृतिक पोखर के निकट बनाया जा रहा है, जो गांव के लोगों व पशु-पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत है।
ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर किए जा रहे इस निर्माण से क्षेत्र में गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण फैलने की आशंका है। इससे तालाब के जल स्रोत के प्रदूषित होने और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की चिंता जताई गई है।
उल्लेखनीय है कि एफएसटीपी प्लांट शुरू से ही विवादों में रहा है। प्रारंभ में यह परियोजना कठूमर में प्रस्तावित थी, लेकिन स्थानीय विरोध के चलते इसे मानखेड़ा स्थानांतरित किया गया। 16 जनवरी को खसरा नंबर 535 पर निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो छह-सात दिन बाद ग्रामीणों के विरोध के चलते रोक दिया गया था।
अब नगरपालिका प्रशासन ने स्थान बदलते हुए खसरा नंबर 537 पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कराया है। प्रशासन द्वारा पैमाइश कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा रहा है और समतलीकरण के साथ तारबंदी की प्रक्रिया भी जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि यह प्लांट क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने और सीवरेज अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है।
इस मौके पर अधिशासी अधिकारी विक्रांत शर्मा, बृजमोहन पंडा, सफाई निरीक्षक कपिल मीणा, विक्रम सिंह, कीर्ति सेन, प्रशांत बेनीवाल, मनोज शर्मा, राजेंद्र कुमार और जीतू शर्मा सहित नगरपालिका कर्मी मौजूद रहे और कार्य की निगरानी की।
वहीं, ग्रामीणों के विरोध के चलते एक बार फिर मामले में विवाद गहराने के संकेत मिल रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस परियोजना को सुचारु रूप से आगे बढ़ा पाता है या विरोध के चलते फिर बाधा उत्पन्न होती है।


