अब मर्जी के मालिक होंगे बिजली उपभोक्ता, स्मार्ट मीटर के लिए नहीं होगी कोई जोर-जबरदस्ती
दिल्ली (कमलेश जैन) बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म कर पोस्टपेड या प्रीपेड स्मार्ट मीटर विकल्प चुनने का अधिकार उपभोक्ता को दिया गया है। अब जिले में स्मार्ट मीटर लगाये जाएंगे,लेकिन वे प्रीपेड होंगे या पोस्टपेड,इसका फैसला उपभोक्ता को करना होगा।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने एक अप्रैल 2026 को नई अधिसूचना जारी कर स्मार्ट मीटर नियमों में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट मीटर लगवाना उपभोक्ता के लिये अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुनने का अधिकार उपभोक्ता को दिया है।
उपभोक्ता अब अपनी मर्जी के मुताबिक प्रीपेड या पोस्टपे़ड स्मार्ट मीटर लगवा सकता है। पोस्टपेड विकल्प में चलने वाले स्मार्ट मीटर में सामान्य मीटर की तरह ही महीने के आखिर में एक बार बिल आएगा और बकाया बिल पर आपको चक्रवृद्धि ब्याज भी देना होगा।
इनमें बिजली विभाग द्वारा बनाए गए ऐप के जरिए रियल टाइम पर बिजली खपत की जानकारी, सटीक बिलिंग, आसान भुगतान, सोलर पैनल के साथ स्मार्ट मीटर का उपयोग और ऑनलाइन रिचार्ज पर मिलने वाली छूट समेत राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है कि सबसे पहले तो बिजली उपभोक्ताओं को यह समझना जरूरी है कि स्मार्ट मीटर सिर्फ एक मीटर है, जिसका काम सिर्फ बिजली खपत की रीडिंग करना है। बिजली का टैरिफ रेट संबंधित राज्य विद्युत विनियामक आयोग हर साल तय करता है और उसी के मुताबित बिजली बिल बनता है।
टेक्नीशियन का काम सिर्फ मीटर बदलना
इस नए संशोधन के अनुसार, उपभोक्ता अब आप अपनी सुविधा से तय करेंगे कि उनको रिचार्ज करना है या महीने के अंत में बिल भरना है। ये फैसला अब उपभोक्ताओं के हाथों में है। विभागीय अधिकारी उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहते हैं कि जब टेक्नीशियन आपके घर मीटर बदलने आए, तो उसे अपना काम करने दें।
टेक्नीशियन का काम सिर्फ मीटर लगाना है। वह चाहकर भी आपके बिलिंग मोड (प्रीपेड या पोस्टपेड) में बदलाव नहीं कर सकता, क्योंकि यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। यह अधिकार केवल बिजली विभाग के पास है।


