रेलवे फाटक बना मुसीबत, रोजाना 8 घंटे जाम में फंसता है शहर; स्वीकृत ओवरब्रिज अब भी फाइलों में कैद
खैरथल (हीरालाल भूरानी)। जिला मुख्यालय बनने के बाद खैरथल शहर की सूरत तो बदली है, लेकिन यातायात की 'सीरत' आज भी पुरानी और कष्टदायक बनी हुई है। शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली दिल्ली-जयपुर रेल लाइन पर स्थित फाटक संख्या 94 आमजन के लिए सबसे बड़ी मुसीबत सिद्ध हो रहा है। दिन भर में करीब 90 बार फाटक बंद होने के कारण शहर रोजाना औसतन 7 से 8 घंटे जाम की आगोश में रहता है।
93 ट्रेनों का दबाव, 10 मिनट का इंतजार मुख्य रेल मार्ग होने के कारण यहाँ से रोजाना 48 पैसेंजर और लगभग 45 मालगाड़ियां गुजरती हैं। प्रत्येक ट्रेन के समय फाटक 5 से 10 मिनट के लिए बंद होता है। फाटक के समीप ही मुख्य बाजार और शिक्षण संस्थान होने के कारण गेट खुलते ही वाहनों का भारी सैलाब उमड़ पड़ता है, जिसे नियंत्रित करना पुलिस और प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है।
20 फीट की गलियों में दौड़ रहा भारी ट्रैफिक
फाटक बंद होने की स्थिति में वाहन चालक वैकल्पिक रास्तों के रूप में कॉलोनियों का रुख करते हैं। इससे आनंद नगर जैसे रिहायशी इलाकों की 20 और 40 फीट चौड़ी सड़कों पर दिनभर भारी वाहनों का दबाव रहता है। जब रेलवे मेंटेनेंस के लिए फाटक को 1 से 3 दिन तक बंद करता है, तब स्थिति और भी भयावह हो जाती है। क्योंकि प्रशासन के पास ट्रैफिक डायवर्जन का कोई ठोस प्लान नहीं होता।
राहत के लिए ये कदम जरूरी
खैरथल को जाम मुक्त बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मांग फाटक संख्या 94 पर स्वीकृत ओवरब्रिज का निर्माण जल्द शुरू करने की है। इसके अलावा रेलवे फाटक नंबर 91 से जुड़े गौरव पथ को चौड़ा किया जाए। इंजीनियर पॉइंट स्कूल के पास एक नया अंडरपास बनाया जाए। रेलवे अंडरब्रिज से केवल हल्के वाहनों को निकालने की व्यवस्था हो। मेंटेनेंस के दौरान पुलिस और रेलवे प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के साथ सिटी ट्रैफिक प्लान लागू किया जाए।


