भरतपुर में फ्लाईओवर की जगह रिंग रोड को 'सिक्स लेन' बनाने का अनूठा सुझाव; समृद्ध भारत अभियान के निदेशक ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
भरतपुर( विष्णु मित्तल) राज्य सरकार द्वारा शहर में करीब 370 करोड़ रुपये की लागत से बनाये जा रहे फ्लाई ओवरों के स्थान पर यदि रिंग रोड को सिक्स लेन में परिवर्तित कर दिया जाता है तो लागत राशि की बचत होगी। वहीं इनके निर्माण के कारण जनता को हो रही भारी परेशानी से मुक्ति मिल जायेगी।
इस सम्बन्ध में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर आग्रह किया है कि फ्लाई ओवरों के निर्माण की गति इतनी धीमी है कि निर्माण का मात्र 2 प्रतिशत ही काम हुआ है। इन फ्लाई ओवरों के स्थान पर रिंग रोड के सिक्स लेन बनाने के बाद बचत राशि का उपयोग सुजान गंगा के जीर्णोद्धार व सेवर से ऊँचा नगला तक एलीवेटेड रोड का निर्माण जैसे कार्यों में किया जा सकता है।
गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में काली की बगीची से सूरजपोल चौराहा तथा हीरादास बस स्टैंड से कुम्हेर गेट तक बनाए जा रहे फ्लाई ओवरों की निर्माण गति अत्यंत धीमी है। करीब 370 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं का अभी तक बहुत कम कार्य हुआ है और जिस गति से निर्माण कार्य चल रहा है, उससे इनके पूरा होने में लगभग तीन वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है।
जिसका उदहारण नदबई कस्बे में बने रेलवे ओवर ब्रिज का देखा जा सकता है जिसे पूरा होने में करीब 15 वर्ष लगे ! उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के कारण जगह-जगह सड़कें संकरी हो गई हैं, गड्ढे खोदे गए हैं तथा ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे आमजन, व्यापारियों, विद्यार्थियों एवं बाहर से आने वाले पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भरतपुर शहर पहले से ही संकरी सड़कों, बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पार्किंग समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले फ्लाई ओवर निर्माण कार्य शहर की आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। व्यापारिक क्षेत्रों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है तथा लोगों को प्रतिदिन घंटों ट्रैफिक जाम में फँसना पड़ रहा है।
गुप्ता ने आशंका व्यक्त की कि फ्लाई ओवर बनने के बाद उनके नीचे गंदगी, अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग तथा असामाजिक गतिविधियों की संभावना बढ़ सकती है, जिससे शहर की सुंदरता एवं स्वच्छता प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि कई शहरों में फ्लाई ओवरों के नीचे अव्यवस्था की स्थिति देखने को मिलती है, जिससे शहर की समग्र छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
निदेशक गुप्ता ने सुझाव दिया कि यदि इन फ्लाई ओवरों के स्थान पर भरतपुर की रिंग रोड को आधुनिक स्वरूप देते हुए सिक्स लेन में विकसित किया जाए तो न केवल यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी, बल्कि शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव भी कम होगा। रिंग रोड के सिक्स लेन बनने से शहर का विस्तार व्यवस्थित तरीके से होगा तथा भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।
गुप्ता ने कहा कि यदि दोनों फ्लाई ओवरों का निर्माण नहीं किया जाता है तो लगभग 350 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। अगर दोनों फ्लाईओवेर को निरस्त करना मुश्किल है तो हीरादास से कुम्हेर गेट का फ्लाईओवर बनाया जा सकता है क्योंकि पता चला है कि उसके निर्माण में काम आने वाले ब्लॉक आ चुके हैं ! जहाँ तक सूरजपोल पर यातायात दबाब का प्रश्न है, उसके लिए होल्कर पार्क के पास की सड़क को चौड़ा करके यातायात दबाब को कम किया जा सकता है ! इसके अलावा पुराने बिजली घर की दीवार को पीछे किया जा सकता है ! शेष राशि का उपयोग भरतपुर के अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों जैसे सुजान गंगा के जीर्णोद्धार, सेवर से ऊँचा नगला तक एलीवेटेड रोड निर्माण, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, पार्किंग सुविधाओं एवं शहर के सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों में किया जा सकता है। इससे भरतपुर का समग्र विकास अधिक संतुलित एवं प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि पत्र में दिए गए सुझावों को शिकायत नहीं बल्कि जनता एवं सरकार के हित में दिए गए सकारात्मक फीडबैक के रूप में देखा जाए तथा भरतपुर के दीर्घकालीन विकास, यातायात व्यवस्था एवं शहर की सुंदरता को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए।


