चाणोद में ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित: 10 परिवादों का हुआ प्राप्त, मौके पर बांटे 15 आवासीय पट्टे

Jun 30, 2026 - 19:26
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चाणोद में ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित: 10 परिवादों का हुआ प्राप्त, मौके पर बांटे 15 आवासीय पट्टे

पाली (बरकत खान) प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर और पानी की किल्लत को देखते हुए राज्य सरकार और कृषि विभाग ने कमर कस ली है। कृषि क्षेत्र में पानी की बर्बादी को रोकने और कम लागत में दोगुनी पैदावार हासिल करने के लिए विभाग द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष 'उन्नत कृषि-जल संरक्षण' जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत किसानों को पारंपरिक खेती छोड़ आधुनिक और वैज्ञानिक तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

ड्रिप और फव्वारा पद्धति अपनाना समय की मांग

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक रूप से खेतों में पानी भरने (फ्लड इरिगेशन) से न सिर्फ पानी की भारी बर्बादी होती है, बल्कि मिट्टी की ऊपजाऊ क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। इसके विपरीत, ड्रिप (बूंद-बूंद) और स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पद्धति से 50 से 60 प्रतिशत पानी की बचत होती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।

"बदलते मौसम चक्र और सीमित जल संसाधनों के बीच आधुनिक तकनीक ही किसानों का एकमात्र सहारा है। सरकार का लक्ष्य हर खेत तक सूक्ष्म सिंचाई पद्धति को पहुंचाना है।"  — निदेशक, कृषि विभाग

सब्सिडी और तकनीकी सहायता का मिलेगा लाभ

विभाग ने किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • लघु व सीमांत किसानों को विशेष छूट: ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर छोटे और सीमांत किसानों को लागत मूल्य पर 70 से 85 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है।
  • सॉइल हेल्थ कार्ड की सुविधा: शिविरों के माध्यम से किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच मुफ्त में की जा रही है, ताकि वे जरूरत के अनुसार ही खाद और पानी का उपयोग करें।
  • सौर ऊर्जा को बढ़ावा: कृषि कुओं पर बिजली की निर्भरता कम करने के लिए 'पीएम कुसुम योजना' के तहत सोलर पंप लगाने पर भी विशेष अनुदान दिया जा रहा है।

कचरा प्रबंधन और जैविक खेती पर जोर

इस अभियान के तहत किसानों को ठोस कचरा अपशिष्ट नियम के तहत खेतों में पराली या फसलों के अवशेष न जलाने की सख्त हिदायत दी जा रही है। कृषि अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि फसल के अवशेषों को जलाने के बजाय उन्हें कंपोस्ट (खाद) में बदलकर जैविक खेती को बढ़ावा दें, जिससे जमीन की सेहत भी सुधरेगी और पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होगा।

अभियान के पहले ही दिन सैकड़ों किसानों ने ड्रिप सिस्टम और सोलर पंप के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगामी एक महीने तक जारी रहेगा ताकि कोई भी किसान इस लाभ से वंचित न रहे।

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