डॉक्टर सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि 'उम्मीद की किरण' होते; सेवा, सहयोग और समर्पण ही चिकित्सा की असली पहचान: -डॉ. सपना शर्मा

Jun 30, 2026 - 19:23
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डॉक्टर सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि 'उम्मीद की किरण' होते; सेवा, सहयोग और समर्पण ही चिकित्सा की असली पहचान: -डॉ. सपना शर्मा

 जयपुर(रितीक शर्मा) "डॉक्टर सिर्फ मरीज का इलाज ही नहीं करते, बल्कि वे निराशा के अंधेरे में एक उम्मीद की किरण होते हैं।" यह विचार 'राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे' के अवसर पर सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) में अपनी सेवाएं दे रहीं प्रसिद्ध डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सपना शर्मा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा का दूसरा नाम ही सेवा, सहयोग और समर्पण है, लेकिन इस समर्पण के बीच डॉक्टर अक्सर खुद की सेहत का ख्याल रखना भूल जाते हैं।

मरीजों की फिक्र में खुद बीमार हो रहे डॉक्टर्स

डॉ. शर्मा ने डॉक्टरों की जीवनशैली पर चिंता जताते हुए कहा कि दिन-रात मरीजों की सेहत दुरुस्त करने वाले चिकित्सक खुद कई गंभीर शारीरिक और मानसिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। व्यस्त दिनचर्या और अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण आज डॉक्टर्स में मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (BP), मोटापा, हृदय रोग, माइग्रेन और स्लिप डिस्क जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं, पर्याप्त आराम न मिलने के कारण वे डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा (Insomnia) और गुस्से जैसी मानसिक परेशानियों से भी जूझ रहे हैं।

"शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ठीक होना भी बेहद जरूरी है। अगर डॉक्टर खुद स्वस्थ नहीं रहेगा, तो वह मरीजों को अपना शत-प्रतिशत कैसे दे पाएगा?" — डॉ. सपना शर्मा

तनावमुक्त जीवन के लिए डॉ. सपना का 'हेल्थ मंत्र'

डॉ. सपना शर्मा ने खुद को फिट और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए अपनी दैनिक दिनचर्या भी साझा की, जो हर किसी के लिए प्रेरणादायक है: -

  • सुबह की शुरुआत: वह प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे उठकर सबसे पहले ईश्वर को नमन करती हैं। इसके बाद 2 से 3 किलोमीटर की दौड़ और करीब 45 मिनट तक व्यायाम (वर्कआउट) उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
  • खान-पान का संतुलन: सुबह के नाश्ते में वे ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीनयुक्त आहार लेती हैं। दोपहर में पूरी तरह संतुलित भोजन और दिनभर भरपूर मात्रा में पानी पीती हैं। रात का खाना बेहद हल्का होता है।
  • डिजिटल डिटॉक्स और परिवार: तनाव दूर करने के लिए वे मोबाइल स्क्रीन का इस्तेमाल कम से कम करती हैं और संगीत सुनती हैं। शाम को 30 मिनट गार्डन में टहलना, परिवार के साथ वक्त बिताना और मंदिर जाना उनकी मानसिक शांति का आधार है।
  • समय पर नींद: वे रात को 11:00 बजे से पहले हर हाल में सो जाती हैं।

सभी चिकित्सकों से आह्वान

लेख के अंत में डॉ. सपना शर्मा ने चिकित्सा जगत से जुड़े अपने सभी साथियों से अपील की है कि वे अपनी व्यस्तता से थोड़ा समय खुद के लिए भी निकालें। उन्होंने सभी डॉक्टरों से इस स्वस्थ दिनचर्या को अपनाने का आह्वान किया ताकि वे खुद स्वस्थ रहकर समाज को बेहतर और दीर्घायु सेवाएं दे सकें।

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