कजनाऊ कलां में नवचौकिया भोमियाजी महाराज के जागरण में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने टेका मत्था
बावड़ी (मिश्रीलाल लखारा) बावड़ी क्षेत्र के कजनाऊ कलां स्थित नवचौकिया भोमियाजी महाराज के पावन धाम में वीर तेजा टाईगर फोर्स (वीटीएफ) के द्वारा आयोजित विशाल जागरण एवं महाप्रसादी कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में दिनभर क्षेत्र सहित दूर-दराज के गांवों से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता रहा। मंदिर परिसर में बनाए गए विशाल जागरण मंडप में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही तथा पूरे दिन दर्शन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा। कार्यक्रम के दौरान आयोजित जागरण में भजन कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भक्तिमय प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भोमियाजी महाराज के जयकारों और मधुर भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिला, पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल हुए तथा श्रद्धालु भजनों पर भावविभोर होकर झूमते नजर आए। महाप्रसादी में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में वीटीएफ ग्रुप, आयोजन समिति, भामाशाहों एवं ग्रामवासियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। पेयजल, बैठने, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था के कारण आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी भामाशाहों, स्वयंसेवकों एवं ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया।
साधक रामदयाल डारा ने बताया कि नवचौकिया भोमियाजी महाराज का धाम क्षेत्र का प्रमुख आस्था का केंद्र रहा है। यहां पर भोमियाजी महाराज को ग्राम रक्षक देवता एवं भूमि के संरक्षक के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह प्राचीन धार्मिक स्थल वर्षों से ग्रामीणों की आस्था का केंद्र रहा है। श्रद्धालु यहां गांव की सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली तथा प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा की कामना लेकर दर्शन करने आते हैं। ग्रामवासियों एवं भामाशाहों के सहयोग से समय-समय पर मंदिर का विकास किया गया है। यहां प्रतिवर्ष विशाल जागरण, महाप्रसादी, धार्मिक अनुष्ठान एवं मेले आयोजित होते हैं, जिनमें जोधपुर जिले सहित आसपास के अनेक गांवों से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह धाम आज धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।


