सरसों फसल के लिए वरदान है सिंगल सुपर फॉस्फेट
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय) 26 अगस्त। सरसों फसल जो आगामी माह में बोयी जायेगी उसके लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट खाद यूरिया का प्रयोग करें जो कि सरसों फसल के लिए डीएपी से बेहतर विकल्प है।
संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार सुरेश चन्द ने कृषको को सलाह दी है कि सुपर फॉस्फेट में फास्फोरस के साथ-साथ गंधक तत्व पाया जाता है जो कि सरसों की पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ तेल की मात्रा भी बढ़ाता है, तेल की मात्रा सरसों में बढ़ने से फसल का दाम भी अच्छा मिलता है। उन्होंने बताया कि सरसों फसल की बुवाई में अभी समय है। जिले में सरसों बुवाई का उपयुक्त समय 1 से 30 अक्टूबर तक है। उन्होंने बताया कि डीएपी में फॉस्फोरस 46 प्रतिशत, नाइट्रोजन 18 प्रतिशत होती है। सुपर फॉस्फेट में फास्फोरस 16 प्रतिशत एवं 11 प्रतिशत गंधक मिलता है। उन्होंने बताया कि सिंगल सुपर फॉस्फेट का फॉस्फोरस पानी में घुलनशील होने के कारण पौधों को तुरन्त उपलब्ध हो जाता है, जबकि डीएपी का फॉस्फोरस साइट्रेट में घुलनशील होता है जो भूमि में स्थिर हो जाता है तथा पूरी मात्रा में पौधों को नहीं मिल पाता जिससे जमीन कठोर हो जाती है।
उन्होंने बताया कि सरसों की अच्छी पैदावार के लिए एक बीघा में 40 किग्रा सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 15 किग्रा यूरिया प्रति बीघा प्रयोग करें। सरसों की फसल में सिंगल सुपर फॉस्फेट व यूरिया का उपयोग किया जाता है तो डीएपी तथा सल्फर से कम लागत आती है। एक बैग डीएपी के विकल्प के रूप में 3 बैग सिंगल सुपर फॉस्फेट व 1 बैग यूरिया का प्रयोग किया जाता है जिसकी लागत 1617 रूपये आती है। यही तत्व हम डीएपी व सल्फर से प्राप्त करें उसकी लागत 2950 रूपये आ रही है।