विज्ञान- वाणिज्य और पीजी कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को निजी कॉलेजों व दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा

May 17, 2026 - 13:08
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विज्ञान- वाणिज्य और पीजी कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को निजी कॉलेजों व दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा

   जिला बना, पर शिक्षा सुविधाएं अब भी अधूरी; खैरथल के राजकीय महाविद्यालय में केवल कला संकाय संचालित

खैरथल (हीरालाल भूरानी) राज्य सरकार जहां नई शिक्षा नीति और उच्च शिक्षा के विस्तार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जिला मुख्यालय खैरथल की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। खैरथल-तिजारा जिला बने तीन वर्ष बीत चुके है, लेकिन शहर के एकमात्र राजकीय महाविद्यालय में आज भी केवल कला संकाय की पढ़ाई ही संचालित हो रही है। विज्ञान और वाणिज्य संकाय के साथ-साथ स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई की सुविधा नहीं होने से सैकड़ों विद्यार्थियों को निजी कॉलेजों अथवा दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
खैरथल अब आसपास के दर्जनों कस्बों और सैकड़ों गांवों का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र बन चुका है। हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय से 12वीं उत्तीर्ण करते है और यहां उच्च शिक्षा की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन सरकारी महाविद्यालय में साइंस और कॉमर्स संकाय नहीं होने से उन्हें अलवर, बीबीरानी या अन्य जगह निजी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेना पड़ता है।
इसका सीधा असर विद्यार्थियों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च भारी बोझ बन चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अनेक छात्र-छात्राएं त्र-छात्राएं प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर दूसरे शहरों में पढ़ने जाने को मजबूर हैं। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। वहीं कई विद्यार्थियों को आर्थिक तंगी के चलते बीच में ही पढ़ाई छोड़ने की नौबत तक आ रही है।
2020 में खुला कॉलेज, 2025 में मिला भवनः 
खैरथल में वर्ष 2020 में राजकीय महाविद्यालय की शुरुआत हुई थी। लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2025 में कॉलेज को अपना भवन भी मिल गया, इसके बावजूद आज तक विज्ञान और वाणिज्य संकाय शुरू नहीं हो सके है। साथ ही महाविद्यालय में किसी भी विषय में एमए की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
 स्थानीय लोगों का कहना है कि जब खैरथल जिला मुख्यालय बन चुका है तो यहां के राजकीय महाविद्यालय में कला, विज्ञान और वाणिज्य सहित सभी प्रमुख विषयों की पढ़ाई उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
निजी कॉलेजों को मिल रहा फायदाः 
सरकारी कॉलेज में विषयों की कमी का सीधा लाभ निजी शिक्षण संस्थानों को मिल रहा है। मजबूरी में विद्यार्थी महंगे निजी कॉलेजों में प्रवेश लेने को विवश है। अभिभावकों का कहना है कि यदि सरकारी कॉलेज में साइंस और कॉमर्स संकाय शुरू हो जाएं तथा प्रमुख विषयों में एमए की कक्षाएं शुरू हों तो क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
युवाओं के भविष्य पर असरः
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिला मुख्यालय पर उच्च शिक्षा की मूलभूत सुविधाओं का अभाव युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को सुलभ और समान बनाना है, लेकिन खैरथल में हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं।
इस संबंध में राजकीय महाविद्यालय खैरथल की प्राचार्या डॉ नीतू जेवरिया ने बताया कि महाविद्यालय की ओर से स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा गया है।

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