कुलपति के फैसले से नया मोड़: महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय में विशेष जांच समिति तत्काल प्रभाव से निरस्त

Jul 8, 2026 - 19:51
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कुलपति के फैसले से नया मोड़: महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय में विशेष जांच समिति तत्काल प्रभाव से निरस्त

भरतपुर (विष्णु मित्तल) महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच को लेकर चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राजभवन के निर्देशों के आधार पर गठित विशेष जांच समिति को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 07 जुलाई 2026 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। इस औचक निर्णय के बाद अब पूरी जांच प्रक्रिया, समिति के गठन की वैधता और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

हितों के टकराव और अपूर्ण दस्तावेजों का आरोप

विशेष जांच समिति के तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध मंडल (BOM) सदस्य विधायक बहादुर सिंह कोली ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। कोली का आरोप है कि जांच अवधि के दौरान उन्होंने कुलपति एवं कुलसचिव को कई विस्तृत प्रतिवेदन भेजकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन प्रशासन द्वारा उन पर कोई स्वतंत्र निर्णय या परीक्षण नहीं किया गया।

कोली ने राजभवन की मूल जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उनके अनुसार, जिस प्रकरण में प्रो. सुरेन्द्र सिंह सिनसिनवार की भूमिका को प्रतिकूल माना गया था, उसी मामले की जांच के लिए उन्हें ही इस विशेष समिति का सदस्य नियुक्त कर दिया गया, जो सीधे तौर पर 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का मामला है। इसके अलावा, समिति को उपलब्ध कराए गए कई दस्तावेज अस्पष्ट, अपठनीय और अपूर्ण थे, जिससे जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई।

मूल आदेश छिपाने का दावा

विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू समिति के निरस्तीकरण के आदेश से जुड़ा है। विश्वविद्यालय के आदेश में कहा गया है कि यह कार्रवाई राज्यपाल सचिवालय के पत्र (दिनांक 01 जुलाई 2026) के निर्देशों के अनुपालन में की गई है। इस पर तत्कालीन अध्यक्ष कोली ने सवाल उठाया है कि समिति का अध्यक्ष होने के बावजूद उन्हें उस मूल पत्र की प्रति क्यों नहीं दी गई, जबकि गठन और निरस्तीकरण के आदेश उन्हें भेजे गए।

"जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए" — बहादुर सिंह कोली

  • "विशेष जांच समिति के अध्यक्ष के रूप में मेरा दायित्व निष्पक्ष एवं विधिसम्मत जांच सुनिश्चित करना था। यदि समिति को निरस्त किया गया है, तो उससे पहले मेरे द्वारा उठाई गई विसंगतियों और आपत्तियों का परीक्षण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन को यह बताना चाहिए कि जिन प्रश्नों को अभिलेख पर उठाया गया, उनका क्या निष्कर्ष निकला।"

नए कुलगुरु से स्वतंत्र समीक्षा की मांग

समिति के निरस्त होने के बाद अब विधायक बहादुर सिंह कोली ने विश्वविद्यालय के नए कुलगुरु (कुलपति) से इस पूरे प्रकरण की एक स्वतंत्र प्रशासनिक समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने राज्यपाल सचिवालय के निर्देशों की मूल प्रति उपलब्ध कराने, जांच से जुड़े समस्त अभिलेखों की पुष्टि करने और पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है ताकि विश्वविद्यालय की साख और पारदर्शिता बनी रहे।

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