किसान अन्नदाता बने ऊर्जादाता : सरकार किसानों को सौर ऊर्जा उत्पादन दे प्रोत्साहन- गुप्ता
भरतपुर (विष्णु मित्तल) राज्य सरकार प्रदेश के किसानो को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनाने के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन नीतियों में परिवर्तन कर कृषकों को सौर ऊर्जा उत्पादन में प्रोत्साहन देने के लिए विशेष योजना लागू करें ! इस सम्बन्ध में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया है ! कि प्रदेश के किसानों को सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना लागू कर सौर ऊर्जा सयंत्र स्थापित करने में सहयोग करना चाहिए ! यदि इसे लागू किया जाता है कि राजस्थान देश का सर्वाधित सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बन जायेगा !
गुप्ता द्वारा लिखे गये पत्र में कहा है कि वर्तमान में प्रदेश में अधिकांश सौर ऊर्जा सयंत्रों की स्थापना निजी क्षेत्र में हो रही है ! किन्तु सरकार अलग से नवीनीकरण ऊर्जा विभाग की स्थापना कर किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य सरप्लस स्टेट बन जायेगा ! राज्य को सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे बड़ा लाभ यह है कि वर्ष में करीब 300 दिनों तक प्रचुर मात्रा में प्रकाश उपलब्ध होता है वहीं सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर 33/11 KV ग्रिड सब स्टेशनों की स्थापना होनी चाहिए !
गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा लगातार किसानों की आय बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते रहे हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए खेतों में फोटोवोल्टिक सोलर पैनल स्थापित कर किसानों की आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है। उनका कहना है कि भविष्य का किसान केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादक और ग्रामीण उद्योगों का संचालक भी बनेगा।
गुप्ता ने सुझाव दिया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में 33/11 केवी ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए जाएं, ताकि किसान अपने खेतों में उत्पादित सौर ऊर्जा सीधे स्थानीय ग्रिड में उपलब्ध करा सकें। इससे लंबी ट्रांसमिशन लाइनों, बड़े ग्रिड सब-स्टेशनों एवं महंगे ट्रांसफार्मरों पर होने वाला व्यय कम होगा, बिजली हानि घटेगी तथा स्थानीय स्तर पर ऊर्जा प्रबंधन अधिक प्रभावी एवं किफायती बन सकेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों द्वारा उत्पादित सौर ऊर्जा का क्रय मूल्य वर्तमान लगभग ₹3.50 प्रति यूनिट के स्थान पर कम से कम ₹4.50 प्रति यूनिट निर्धारित किया जाए। इससे किसानों को उनकी ऊर्जा का उचित मूल्य मिलेगा और अधिक किसान सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रेरित होंगे।
सुझाव-पत्र में कहा गया है कि लगभग ₹2 करोड़ लागत वाली सौर परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक दो वर्षों में किसानों को कम से कम ₹50 लाख का पूंजीगत अनुदान प्रदान किया जाए। इससे छोटे एवं मध्यम किसान भी इस क्षेत्र में निवेश कर सकेंगे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
सीताराम गुप्ता ने कहा कि किसानों को उत्पादित सौर ऊर्जा का स्थानीय स्तर पर उपयोग करने के लिए तेल एक्सपेलर, आटा चक्की, कोल्ड स्टोरेज, कृषि प्रसंस्करण इकाइयों एवं अन्य कृषि-आधारित लघु उद्योगों की स्थापना हेतु विशेष प्रोत्साहन एवं वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा तथा गांव आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
सीताराम गुप्ता ने कहा कि यदि इन सुझावों को राज्य की सौर ऊर्जा नीति में शामिल किया जाता है तो राजस्थान का किसान केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि ऊर्जादाता और उद्यमी भी बनेगा। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा विकसित राजस्थान और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राज्यहित, किसानहित एवं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इन सुझावों पर सकारात्मक विचार कर राजस्थान को किसान-केंद्रित सौर ऊर्जा विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाया जाए।


