कर्तव्य पथ पर मिसाल: स्कूल के बाद घुमंतू व बंजारा समाज के चिरागों को रोशन कर रहीं डॉ. मोनिका विजय
विद्यालय समय के उपरांत घुमंतू व बंजारा समाज के बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहीं डॉ. मोनिका विजय
राजगढ़ (अनिल गुप्ता): राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नीमला में कार्यरत शिक्षिका डॉ. मोनिका विजय अपने शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ समाज सुधार की एक मिसाल पेश कर रही हैं। वे विद्यालय समय समाप्त होने के बाद घुमंतू और बंजारा जाति के शिक्षा से वंचित बच्चों की बस्तियों में पहुंचकर उन्हें पढ़ाई के प्रति जागरूक और प्रेरित कर रही हैं।
निःशुल्क सामग्री और प्रेरणा का संबल: डॉ. मोनिका लंबे समय से इन बस्तियों में जाकर बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में जुटी हुई हैं। वे न केवल बच्चों को पढ़ाई का महत्व समझाती हैं, बल्कि उनकी आवश्यकता अनुसार पाठ्य सामग्री (किताबें, कॉपी, पेन आदि) भी स्वयं के स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध कराती हैं।
अभिभावकों की सोच में आ रहा बदलाव: केवल बच्चों तक सीमित न रहकर डॉ. मोनिका उनके माता-पिता से व्यक्तिगत रूप से संवाद करती हैं। वे उन्हें शिक्षा का महत्व समझाते हुए बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करती हैं। उनकी इस सतत प्रेरणा और निष्ठा का ही परिणाम है कि आज इन पिछड़े और वंचित परिवारों के बच्चे नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने लगे हैं। शिक्षिका के इस निस्वार्थ प्रयास की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

