चरक जयंती सप्ताह के अंतिम दिन विद्यार्थियों को दी स्वास्थ्य परक जानकारी, चरक संहिता को बताया स्वस्थ जीवन का आधार
उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव): कस्बे की गांधी नव जीवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में चरक जयंती सप्ताह के अंतिम दिन शनिवार को विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 'आयुर्वेद मेडिकल एसोसिएशन' के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र कुमावत ने विद्यार्थियों को आयुर्वेद सम्मत स्वास्थ्यवर्धक और उपयोगी जानकारियां दीं।
चरक संहिता केवल पुस्तक नहीं, जीवन जीने की दृष्टि: डॉ. कुमावत ने बताया कि आचार्य चरक भारतीय चिकित्सा परंपरा के इतिहास में सूर्य की तरह प्रकाशमान हैं। उनकी रचना 'चरक संहिता' आयुर्वेद का मूल आधार है, जिसे आज 'काय चिकित्सा' (मेडिसिन) के रूप में जाना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग को दूर करना है।
विद्यार्थियों के लिए दिए मुख्य स्वास्थ्य मंत्र:
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ऋतुचर्या और संतुलित आहार: 'हितभूक, मितभूक व रितभुक' का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि भोजन ताजा, सुपाच्य और आवश्यकतानुसार होना चाहिए। "भोजन उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में" का संकल्प दोहराते हुए जंक फूड और पैक्ड फूड से दूर रहने की सलाह दी।
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दिनचर्या और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: देर रात तक मोबाइल चलाने, शारीरिक गतिविधि न करने और अनियमित खानपान से बचने की हिदायत दी। उन्होंने नियमित योग, प्राणायाम और उचित नींद को सफलता के लिए अनिवार्य बताया।
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पर्यावरण संरक्षण से स्वास्थ्य: चरक जयंती को सार्थक बनाने के लिए उन्होंने प्रत्येक विद्यार्थी से एक पौधा लगाने, औषधीय पौधों व जल का संरक्षण करने और प्लास्टिक का उपयोग घटाने का आह्वान किया।
स्वास्थ्य संरक्षण का लिया संकल्प: कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने 'रोग होने के बाद उपचार' की जगह 'रोग से पूर्व बचाव' की आयुर्वेदिक अवधारणा को अपनाते हुए दैनिक जीवन में अच्छी आदतें ढालने का संकल्प लिया। संस्था प्रधान मूलचंद गुर्जर ने इस प्रेरणादायक सत्र के लिए डॉ. कुमावत का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर स्कूल स्टाफ के नीरज यादव, बीरबल देवठिया, आकाश कुमावत, श्रीमती चंपा रामुका, रेशमी कुमावत व फूलचंद सैनी सहित अनेक शिक्षक व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

