आस्था से भरपूर न्यौंठा का बाबू बाबा मन्दिर; न्यौंठा में 13 सितम्बर को लगेगा श्री बाबू बाबा मेला
हलैना (विष्णु मित्तल) कस्वा हलैना से करीब 7 किमी दूर उपखण्ड नदबई क्षेत्र के गांव न्यौंठा स्थित प्राचीन एवं आस्था से भरपूर श्री बाबू बाबा मन्दिर पर 13 सितंम्बर को श्री बाबू बाबा का मेला लगेगा, जिसकी तैयारियों के लिए गांव के गणमान्य नागरिक एवं मेला कमेटी की बैठक हुई, जिसमें मेला कार्यक्रम की रूपरेखा, यातायात, पेयजल, रोशनी, सुरक्षा आदि की व्यवस्था पर चर्चाए की गई साथ ही मेला कमेटी का गठन किया गया। मेला कमेटी के सदस्य लाखन पाठक एवं मास्टर बाबूलाल ने बताया कि गांव न्यौंठा में 13 सितम्बर को श्री बाबू बाबा का मेला लगेगा, मेले के एक दिन पहले 12 सितम्बर को शान्तिकूंज हरिद्वार गायत्री परिवार के द्वारा कलश यात्रा निकाली जाऐगी और सायं महा दीपयज्ञ का आयोजन होगा। दूसरे दिन 13 को ध्वजा पूजन, श्री बाबू बाबा की पूजा-अर्चना, फूल बंगला व 56 भोग झांकी दर्शन, अन्नकूट प्रसादी व रज वितरण, महाआरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत रागनी गायन, खेलकूद प्रतियोगिता आदि कार्यक्रम होंगे। उन्होने बताया कि यातायात व्यवस्था को मद्देनजर रखते हुए झारकई से न्यौंठा, सरसैना से न्यौंठा, पीली से न्यौंठा, भौसींगा से न्यौठा, नूरपुर से न्यौंठा, खांगरी से न्यौंठा मार्ग पर अलग-अगल पार्किंग सुविधा होगी और थाना नदबई, हलैना, लखनपुर, खेडली मोड, वैर सहित पुलिस लाइन का स्पेशल जाप्ता रहेगा। मेले के दिन सुवह 7 बजे से सायं 7 बजे तक हलैना से नदबई मार्ग पर लोेडिंग एवं बडे वाहनों की रोकथाम रहेगी। गांव एवं मेला कमेटी के द्वारा पेयजल, ठहराव, रोशनी, सुरक्षा, भोजन आदि की निःशुल्क सुविधाए की जाऐगी।
- प्रेम का प्रतीक बाबू मेला
गांव न्यौंठा स्थित आस्था से भरपूर श्री बाबू बाबा महाराज का मन्दिर आस्था का केन्द्र है, जो गुर्जर समुदाय का आराध्य देव एव करीब 500 से अधिक साल पुराना है, गुर्जर समुदाय के अलावा सर्व समाज व मुस्लिम समुदाय के लोग भी आस्था रखते है, सर्व धर्म व जातियों के लोगों को एक साथ देख देशभक्ति, भाई चारा व धर्मनिरपेक्षता की झलक दिखती है, जहां बाबू बाबा के अलावा एक दर्जन देवीण्देवताओं की प्रतिमाए तथा आधा दर्जन अन्य धार्मिक स्थल बने हुए है। वर्ष में एक बार लक्खी मेला तथा हर माह लघु मेला लगता है, मन्दिर के दर्शन एवं मेला में देश-विदेश के लोग आते है, जिसमें सर्वाधिक सख्यां कुष्ठ, चर्म रोगी एवं सन्तानहीन महिलाएं की होती है, जो दर्शन कर बाबा की धुना की रज लगा, चीनी की प्रसादी चढाते है और अन्नकूट प्रसादी ग्रहण कर बाबू बाबा का गुणगान करते है।
-- किंदवंती पर श्रद्वालुओं का विश्वास
गांव न्यौंठा निवासी शिक्षाविद्व दौलतराम पाठक एव सुमरन गुर्जर बताते है कि गांव न्यौंठा करीब 500 साल से अधिक पुराना गावं है, जहां गुर्जर, पण्डित, वैश्य, सैनी, जाटव, प्रजापत जातियों के अलावा अन्य जाति के लोग रहते है। गांव में प्राचीन बाबू महाराज का मन्दिर है, जिसको लेकर अनेक किंदवंतियां है। गांव का एक ग्वाला दुधारू मवेशियां चराने जंगल में जाता, जिन मवेशियों से एक गाय रोजना पोखर के पास जाती और एक मिटटी के टीले पर उसके चारों थन से दूध की धार निकली, ऐसा रोजाना होता। जिसको देख ग्वाला की समझ में कुछ नही आया, कई दिन ऐसा हुआ, वह चुप लगा नजारा देखता। ग्वाला ने गाय का पीछा किया, टीले के पास गया, जहां उसे चांदी का सिक्का मिला, ग्वाला ने घर पर जा कर गाय की बात बताई। सभी ने ग्वाला की बात पर हाथ रख देते वह खुश हो जाता। उन्होने बताया एक बार गांव की महिलाए पोखर पर मिटटी लेने गई, जहां सास-बहू मिटटी खोद रही थी। टीले के पास खुदाई करते समय बहू को भूमि से आवाज सुनाई दी, बहिन मुझे निकाल ले। सास-बहू डर गई, साथ गई अन्य एक महिला ने हिम्मत कर टीले के खुदाई की। जिसमें प्रतिमा निकली। गांव में प्रतिमा को लेकर अनेक चर्चाए होने लगी। गांव के लोगों ने पोखर किनारे एक चबूतरा बना कर प्रतिमा को स्थापित कर दिया। गांव के शिक्षाविद्व पुरूषोत्तम पटेल ने बताया कि बाबू बाबा के अवतार की भूमि चम्बल नदी किराने है। जहां हजारों साल पहले 80 साल की सिया ने कठोर तप किया, जो कुष्ठरोग से पीडित थी ओर सन्तान से वंचित। सिया के बाबू महाराज की कृपा से पुत्र की प्राप्ति हुई और कुष्ठरोग से छुटकारा मिला। बाबू महाराज ने सिया को वरदान दिया कि जो कुष्ठ व चर्मरोग से पीडित तथा सन्तानहीन महिला निस्वार्थ भाव से मानव सेवा एवं मूक बधिर प्राणियों की सेवा करेगा एवं मांस व मदीरा को सेवन नही करेगा, उसे कुष्ठरोग से छुटकारा मिलेगा एवं सन्तान की प्राप्ति होगी। उक्त प्रकरण की चर्चाए दूरण्दूर तक फैल गई और भारी सख्यां में लोग बाबू महाराज की पूजाण्अर्चना करने लगे।
- बाबा की रज से मिठता होते चर्मरोग
गांव न्यौंठा निवासी सुमरन गुर्जर एवं राजकुमारी बताते है कि बाबू महाराज मन्दिर पर करीब 465 साल से धुना जल रहा है, जिसकी रज लगाने से चर्मरोग से पीडित व्यक्ति को कुष्ठ, सफेद धब्बा एवं अन्य चर्मरोग से छुटकारा मिलता है और बाब के दर्शन एवं धुना की परिक्रमा लगाने से सन्तान की प्राप्ति होती है। प्रतिसाल मेला लगता है। मेला के दिन 4 से 5 लाख रज की पुडियां वितरण हो जाती है। बाबा की रज पर आमजन को विश्वास कायम है।
- बाबा को चीनी की प्रसादी पसन्द
श्री बाबू बाबा को चीनी और अन्नकूट की प्रसादी बेहद पसन्द थी, जिन्हे आज भी लोग भोग में चीनी की प्रसादी चढाते है और मन्दिर पर बनी अन्नकूट की प्रसादी ग्रहण करते है। गांव के रामकिसन पटेल एवं लक्ष्मण सैनी बताते है बाबा पर जब चीनी की प्रसादी चढाई जाती है, उसका रसीला व तरल पदार्थ भूमि पर जमा होता है, जिसको चर्म रोग से पीडित लोग शरीर पर लगाते है, साथ ही धूना की रज, जो रज गांव के गोबर के कंडे जला कर तैयार की जाती है। उन्होने बताया कि जहां भी बाबू बाबा के मन्दिर स्थापित है, वहां केवल चीनी की प्रसादी का भोग ही लगता है।

