20 साल बाद छलके कैलाशनगर के तालाब: 500 से अधिक बहनों ने समंदर हिलोरकर रचा इतिहास, धर्म भाइयों ने ओढ़ाई चुनड़ी
कैलाशनगर/सिरोही:
जब कुदरत मेहरबान हुई और दो दशकों का इंतजार खत्म हुआ, तो सिरोही के कैलाशनगर, सेऊड़ा और अखापुर गाँव भक्ति, परंपरा और भाई-बहन के पवित्र स्नेह के अनूठे संगम के साक्षी बने। पूरे 20 साल बाद गांवों के लबालब भरे तालाबों पर पारंपरिक 'तालाब पूजन' का भव्य आयोजन किया गया, जिसने पूरे इलाके को उत्सव के रंग में सरोबार कर दिया।
तालाब पर उमड़ा जनसैलाब, बना मेले जैसा माहौल
मंगल गीतों की गूंज और लाल-गुलाबी परिधानों में सजी 500 से अधिक महिलाओं के कदमों से तालाब का घाट जीवंत हो उठा। हजारों ग्रामीण इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने, जिससे तालाब किनारे मेले जैसा खुशनुमा माहौल नजर आया।
'समंदर हिलोरने' की परंपरा और संकल्प
पूजन के दौरान बहनों ने पानी में उतरकर सदियों पुरानी 'समंदर हिलोरने' की रस्म निभाई। इसके बाद भाई-बहनों ने एक-दूसरे को तालाब का पवित्र जल पिलाकर प्रेम, आदर और जीवनभर रक्षा करने का संकल्प लिया। भाइयों ने अपनी बहनों को चुनड़ी ओढ़ाकर पूरी निष्ठा के साथ गोद भराई की रस्म अदा की।
भाई-चारे की मिसाल: धर्म भाइयों ने ओढ़ाई चुनड़ी
इस आयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब देखने को मिली जब सामाजिक समरसता की मिसाल कायम हुई। जिन बहनों के सगे भाई नहीं थे, वे भी इस खुशी से महरूम नहीं रहीं। अन्य समाजों के धर्म भाइयों ने आगे बढ़कर उनके हाथों पर रक्षासूत्र बांधा, सिर पर चुनड़ी ओढ़ाई और एक सच्चे भाई का फर्ज निभाया।
उपवास खोलकर मांगी दीर्घायु की कामना
दिनभर उपवास रखकर तालाब पूजन करने पहुंची बहनों के लिए भाइयों ने राशन सामग्री पहुँचाई, जिससे बहनों ने अपना व्रत खोला। बहनों ने जहाँ एक ओर भाइयों की लंबी उम्र की दुआएँ माँगीं, वहीं भाइयों ने भी अपनी बहनों को सुरक्षा का वचन देते हुए मनभावन उपहार भेंट किए।
20 साल बाद हुआ यह आयोजन न केवल जल संरक्षण के प्रति आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने रस्मों-रिवाजों और मानवीय रिश्तों की गर्माहट को एक बार फिर से तरोताजा कर दिया।

