ग्रामीण काकियों ने कहा राहुल गांधी नहीं कर पाए हिन्दू को परिभाषित

ताज्जुब है राहुल बाबा से किस ने मांगा था स्पस्टीकरण कि -मैं हिन्दू हूं हिंदुत्वादी नहीं

ग्रामीण काकियों ने कहा राहुल गांधी नहीं कर पाए हिन्दू को परिभाषित

अलवर (राजस्थान) जयपुर में गहलोत सरकार की महंगाई को लेकर आयोजित महारैली में राहुल गांधी महंगाई के मुद्दे पर बोलने की बजाए हिन्दू और हिंदुत्वादी पर ही लगातार बोलते रहे।शायद राहुल गांघी को यह जानकारी थी कि वे चुनाव प्रचार में प्रदेश के किसानों को दस दिन में कर्ज माफी का वादा कर के गए थे, वह वादा गहलोत सरकार ने आज तक पूरा नहीं किया है,दूसरी वजह यह भी रही होगी कि देश के अन्य प्रांतों के बजाए सीएम गहलोत के प्रदेश में सबसे अधिक बिजली और डीजल,पेट्रोल के दाम आमजनता से वसूले जा रहे है।यही वजह रही कि राहुल गांधी महंगाई पर बोलने की बजाए हिंदुत्व पर बोलने लगे,जनता का कहना है कि राहुल बाबा से कौन स्पष्टीकरण मांग रहा है कि वे किस जाति धर्म से ताल्लुक रहते है।उन्होंने हिन्दू और हिंदुत्वादी की परिभाषा भी गलत बताई है।
सकट गांव की मनभरी काकी,ओड़पुर गांव की उगनती काकी,राजपुर गांव की भगवती काकी सहित अन्य ग्रामीण कल्चर में रची बसी लेकिन शिक्षित महिलाओं का मानना है कि राहुल गांधी शिक्षित नहीं बल्कि सिर्फ साक्षर है इसीलिए उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इस देश के हिन्दू कौन है जबकि वाकई मूलरूप से हिन्दू तो वे सभी है जो इस देश में अपनी सभी पूर्व पीढ़ियों के रहते आए है।अब इससे अलग बात करते है।हिन्दू तो राहुल गांधी,सीताराम येचुरी,मायावती,मुलायम और रवीश कुमार जैसे लोग भी है।हिन्दू तो केजरीवाल और लव जिहाद करने वाले भी होते है क्योंकि वो हिन्दू नाम धारण कर के ही हिन्दू लड़कियों को गुमराह करते है।हाथ में कलवा बंधे कसाब पकड़ा नहीं जाता तब तक वो भी हिन्दू ही होता है।सही मायने में यह हिन्दू होने का अर्थ होता है।जबकि सनातन धर्म को आधुनिक युग में हिंदुत्ववाद का नाम देकर इसके अर्थ को सीमित कर दिया गया है।हिंदुत्ववाद का अर्थ वो भूमि जहा देवी देवताओं का वास होता है जिसे नष्ट करने की आसुरी शक्तियां सदैव प्रबल रही है,आज भी है लेकिन इनको पूर्ण सफलता कभी प्राप्त नहीं हुई।जो इस देश की जड़ से जुड़ा महसूस करता है अपने कर्म विचार और अभिव्यक्ति से  वो हिन्दू है,भले ही नाम से वो कुछ भी हो।जो ऐसा नहीं करता वो हिन्दू नहीं भले ही वो नाम से हिन्दू हो।
नॉलेज से परिपूर्ण ग्रामीण महिलाओं का मानना है की राहुल गांघी गोल टोपी पहन कर इफ्तार पार्टी कर अल्पसंख्यक वर्ग को गुमराह कर चुके है अब उन्हें अंदाजा हो चुका है कि इस देश का हिन्दू जातिवर्ग से ऊपर उठकर एकजुट होकर चुनाव में अपनी अहम भूमिका निभाने लगा इसीलिए राहुल बाबा काफी समय से चुनाव नजदीक आते ही कभी उनेऊ धारण करने लगते है तो कभी अपने माथे पर तिलक लगाकर अपना गोत बताकर देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास करते है जबकि देश के इक्कीसवीं सदी के इंटरनेट की दुनिया में रहने वाले युवाओं को बरगलाना संभव नहीं है।कांग्रेस की नोटनकी से कांग्रेस का स्थाई वोटबैंक भी छिटकने लगा है।अल्पसंख्यक वर्ग को भी अब यह अहसास होने लगा है कि कांग्रेस ने उन्हें सिर्फ आबादी बढ़ाने का माध्यम बनाकर बेरोजगारी -गरीबी की लाइन में खड़ा करने के अलावा उत्थान की कोई सटीक योजना बनाई ही नहीं है।

  •     रिपोर्ट:- राजीव श्रीवास्तव