गुरु अस्त के साथ मांगलिक कार्यों पर लगी रोक , नहीं बजेगा बैंड बाजा
लक्ष्मणगढ़ (अलवर ) कमलेश जैन पंडित योग शिक्षक लोकेश कुमार के अनुसार, 11 जून बुधवार को बृहस्पति अस्त हो रहे हैं। इसके साथ ही छह जुलाई को देवशयनी एकादशी होने पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चार माह के लिए चले जाएंगे। इस कारण नवंबर तक मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दौरान मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से विराम लग जाएगा।
इन कार्यों में लगता है विराम- भगवान विष्णु के योग निद्रा अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। यह अवधि चार महीने की होती है। चातुर्मास के दौरान शादी-विवाह, जनेऊ, मुंडन, गृह प्रवेश आदि जैसे सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। इस अवधि में साधु-संत और सन्यासी चार महीने तक भजन-कीर्तन, भगवत गुणगान, कथा-प्रवचन जैसे धार्मिक कार्यों में लीन रहते हैं।
नवंबर-दिसंबर में फिर बजेगा बैंड-बाजा: चातुर्मास का समापन 18 नवंबर को कार्तिक शुक्ल देवोत्थान एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु के निद्रा से जागृत होने के साथ होगा। इसके बाद ही मांगलिक कार्य एक बार फिर से शुरू हो पाएंगे।
चातुर्मास में क्या करें और क्या न करें: चातुर्मास के दौरान भगवत पूजन, शिव पुराण का पाठ, महामृत्युंजय का जाप, एकांतवास में स्वाध्याय, दान-पुण्य, गौ एवं ब्राह्मण की सेवा और तीर्थ यात्रा जैसे धार्मिक कार्य करने चाहिए। इस अवधि में शादी-विवाह, उपनयन, मुंडन, गृह प्रवेश और कीमती चीजों की खरीदारी जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।